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बीएसए कार्यालय पर तालाबंदी करने पर जीपीए के पदाधिकारियों पर हुई एफआईआर दर्ज

गाजियाबाद। जीपीए लगातार आरटीई के अंतर्गत चयनित गरीब बच्चो के दाखिले कराने की आवाज बुलंदी से उठा रही है पिछले 5 महीनों के दौरान अनेकों ज्ञापन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला अधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को दिए जाने के साथ सभी कार्यालयों पर प्रदर्शन भी किया जा चुका है उसके बाद भी शिक्षा अधिकारी हाथ पर हाथ रखे बैठे है।

गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के सचिव अनिल सिंह और संरक्षक सत्यपाल चौधरी ने बताया की 5 अगस्त को एक बार फिर आरटीई के गरीब बच्चो के दाखिले कराने के लिए जीपीए की टीम बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे तो बीएसए कार्यालय से नदारद मिले लगभग 3 घंटे इंतजार करने के बाद जब बीएसए नही आए तो अपना काम धंधा छोड़कर 5 महीने से चक्कर लगा रहे अभिभावकों और जीपीए ने सरकार तक आवाज पहुंचाने के लिए तालाबंदी करने का निर्णय लिया भारी पुलिस फोर्स भी मौके पर मौजूद रही। जिसके बाद एसएचओ रवि गौतम और दयानंद चौकी इंचार्ज मंजू सिंह ने सारे प्रकरण को समझते हुए तालाबंदी खुलवाई गई और आश्वस्त किया गया की सभी बच्चो के दाखिले कराने में पुलिस प्रशासन भी मदद करेगा उसके बाद भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जीपीए के पदाधिकारियों पर निराधार आरोप लगाकर भारतीय न्याय संहिता की धारा 191(2), 115 (2), 352 , 132 , 126(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया है, जो निंदनीय है। गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष सीमा त्यागी ने कहा कि जिले के शिक्षा अधिकारी आरटीई के दाखिले तो करा नही पाए और ना ही निजी स्कूलों द्वारा दाखिले नही लेने पर कार्यवाई कोई कार्यवाई कर पाए उल्टे उन्होंने गरीब बच्चो के दाखिलों की आवाज उठाने वाली संस्था गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करा कर दिखा दिया की सरकार और अधिकारी निजी स्कूलों के दबाव में काम कर रहे है। जब तक इन सभी बच्चो को शिक्षा का अधिकार नहीं मिल जाता गाजियाबाद पेरेंट्स एसोसिएशन के क्रांतिकारी सिपाही चैन से नहीं बैठेंगे। इसलिए शिक्षा अधिकारी एफआईआर कराने के बजाय आरटीई के बच्चो का दाखिला कराने पर ध्यान केंद्रित करे जीपीए की लीगल टीम ने अपनी कमान संभाल ली है जो एफआईआर का विधिक रूप से जबाब देगी। जीपीए के पदाधिकारियों पर एफआईआर दर्ज होने पर अभिभावकों , सामाजिक संगठनों एवम राजनैतिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है।

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