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श्राद्ध में पूर्वजों की स्मृति हेतु एक पेड़ का पौधारोपण अवश्य करें- राजीव कुमार धीर

श्राद्ध विशेष:- “दर्शना देवी सेवा फाउंडेशन” “एक कदम सेवा की ओर”
गाजियाबाद। अपने हिंदू रीति रिवाज में श्राद्ध का बहुत बड़ा महत्व होता है। श्राद्ध मनाना अथवा अपने पूर्वजों को जो इस दुनिया में नहीं है उनको याद करना। उनकी आत्मा को शांति मिले, अपने घर परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे इसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करना। श्राद्ध पर हम उनके मनपसंद पकवान बनाते हैं, श्रद्धा से ब्राह्मण को बुलाकर खाना खिलाते हैं।  उनका आशीर्वाद लेकर अपने पूर्वजों को याद करते हैं। हम पूर्वजों को एक ही दिन याद क्यों करते हैं क्यों ना हम प्रतिदिन परिवार के संग उनको याद करें। उनका आशीर्वाद लें, हमारी अगली पीढ़ी भी उनको याद रखें तथा उनमें भी अच्छे संस्कार की भावना आए।


तब हम क्या करें जिससे हमारे पूर्वजों को रोज याद रखें ?


श्राद्ध पर अपने परिवार के साथ पित्तरो के नाम से बच्चों के हाथ से एक पौधा अवश्य लगवायें तथा पौधे की रोज देखभाल कर उसको बड़ा करें। पौधे की मन से देखभाल में पूरे परिवार की सहभागिता हो। आप महसूस करेंगे की उस पौधे के प्रति अपने परिवार का लगाव बढ़ गया है। आप उस पित्तर रूपी पौधे का आशीर्वाद लें। प्रतिदिन सेवा करें व उस पौधे को बड़ा करें। इससे कई लाभ होंगे। आप जब भी उस वृक्ष को देखेंगे तो आपके पूर्वज आपको याद आते रहेंगे। बच्चों में अच्छे संस्कार आएंगे। पर्यावरण शुद्ध होगा। राहगीरों को छाया मिलेगी। पक्षियों का उस पर वास रहेगा। भिन्न-भिन्न वृक्ष पर कई तरह के फल मिलेंगे। आप जब भी उस वृक्ष के नीचे खड़े होंगे आपको सुख की अनुभूति होगी मानो जैसे आपके ऊपर पूर्वज का आशीर्वाद मिल रहा है। एक परिवार यदि एक वर्ष में 2 पेड़ भी लगाता है और उनको देखकर हजारों लोग भी ऐसे ही पेड़ लगाए तो धरती पर पेड़ों की कमी नहीं रहेगी। शुद्ध हवा के कारण पर्यावरण शुद्ध होगा, गर्मियों में छाया मिलेगी, सुबह-शाम पक्षियों  की चहक आपके मन को आनंदित करेगी, कितना सुंदर दृश्य होगा। ऐसी अनुभूति आपको वृक्ष लगाने के बाद ही मिलेगी।
मेरा आप सब से हाथ जोड़कर निवेदन है कि आप इस श्राद्ध में  कम से कम दो पौधे जरूर लगाए और ओरो को भी लगाने के लिए प्रेरित करें। हम इसी श्राद्ध में ही पौधे लगाकर संकल्प लें कि हर वर्ष के श्राद्ध में अपने पूर्वजों के नाम पौधा लगाकर पर्यावरण को बचाने में हमारी भागीदारी रहेगी तथा उनका आशीर्वाद लेते रहेंगे।

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