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सत्संग सरोवर में गोता लगाने से होता है जीव का कल्याण – श्री सतपाल महाराज

प्रयागराज,29 जनवरी। महाकुम्भ में मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में दूसरे दिन देश विदेश से पधारे श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सदगुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि साधु संतों का सत्संग एक सरोवर है जहां पर डुबकी लगाने से जीव का कल्याण होता है।जीव जब एकाग्रचित होकर परमात्मा की ओर अग्रसर होता है तो उसके हृदय में सदभावना,आपसी भाई चारा एवम सहिष्णुता उत्पन्न होने लगती है।जिससे उसके जीवन में परिवर्तन आता है।
उन्होंने आगे कहा कि साधु संतों का जो सानिध्य है यह अपने आप में एक तीर्थ के समान है, जहां यह माना जाता है कि व्यक्ति डुबकी लगाता है, अपने आप को पूरी तरीके से समर्पित कर देता है। जैसे लोग संगम तट पर जाकर के डुबकी लगा रहे हैं, नाक और मुंह को बंद करके अपने शरीर को पानी की सतह के नीचे ले जाते हैं। कहने का अभिप्राय यही है कि जब तक हम पूर्ण रूपेण समर्पित अपने आप को नहीं करेंगे, हम हृदय को खोल करके नहीं सुनेंगे समर्पण नहीं करेंगे तब तक मर्म समझ में नहीं आएगा।

श्री महाराज जी ने कहा कि प्रभु का नाम ही कलिकाल के प्रभाव से बचा सकता है। जब हमारी आत्मिक शक्ति मजबूत होगी और आत्मा में स्थित होकर इंद्रियों को वश में कर जब ध्यान व भजन-सुमिरन का अभ्यास करेंगे तो धीरे-धीरे यह मन स्थिर होने लगेगा और परम प्रकाश स्वरूप परमात्मा का दर्शन होना प्रारंभ हो जाएगा। जब आत्मिक शक्ति हमारे साथ होगी तो हम अधिक शक्तिशाली हो जाएंगे। जैसे आपने देखा स्वच्छता अभियान में कूड़ा हटाओ,सफाई करो ऐसे ही अपने अंदर का भी कूड़ा में बाहर निकाल कर फेंकना पड़ेगा। अंदर की स्वच्छता भी हमें करनी होगी। जब हमारा मन स्वच्छ होगा निर्मल होने लगेगा तो धीरे-धीरे संसार हमें प्रभुमय दिखाई देने लगेगा। हम कभी किसी जीव या प्राणी किसी का अनहित नहीं करेंगे। इसलिए जीवन में हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि गुरु के द्वारा बताए हुए आध्यात्मिक मार्ग को आत्मसात कर अपने जीवन को सफल बनाएंगे ही तथा दूसरों के प्रति करुणा प्रेम दया, क्षमा, सहिष्णुता एवं अध्यात्म के मार्ग से जोड़ते हुए उसे भी आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। यही आध्यात्मिक ज्ञान सिखाता है, बताता है।
सम्मेलन में पूज्य माता श्री अमृता जी एवम श्री विभुजी महाराज जी ने भक्तों को अध्यात्म मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणादायक विचार रखे।

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