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ए.बी.ई.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज को मिला स्वायत्तशासी संस्थान का दर्जा, शिक्षा के क्षेत्र में रचा नया इतिहास

गाजियाबाद,(आनन्द धारा न्यूज़)। गाजियाबाद स्थित प्रतिष्ठित ए.बी.ई.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज ने शिक्षा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज को अब स्वायत्तशासी संस्थान का दर्जा प्रदान किया गया है। यह मान्यता संस्थान की निरंतर शैक्षणिक गुणवत्ता, नवाचार की दिशा में प्रयास, एवं उत्कृष्ट प्लेसमेंट रिकार्ड का परिणाम मानी जा रही है।

स्वायत्तता प्राप्त होने के बाद कॉलेज को पाठ्यक्रम निर्माण, मूल्यांकन प्रणाली एवं अकादमिक योजनाओं को अपनी आवश्यकताओं और उद्योग की मांगों के अनुरूप तय करने की पूरी स्वतंत्रता होगी। इससे न केवल विद्यार्थियों को आधुनिक और व्यावहारिक शिक्षा मिलेगी, बल्कि उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर अवसर भी मिलेंगे।

इस गौरवपूर्ण अवसर पर संस्थान के महासचिव शाश्वत गोयल ने कहा,”यह हमारे पूरे ए.बी.ई.एस. परिवार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। हमने हमेशा शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी है। यह दर्जा हमें अपने विजन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायता करेगा।”
संस्थान के सलाहकार अभय अग्रवाल ने कहा, “यह उपलब्धि ए.बी.ई.एस. को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बनाएगी। विद्यार्थी अब और अधिक व्यावहारिक, समृद्ध और आधुनिक शिक्षा का अनुभव कर सकेंगे।”

प्रबंधन समिति के सदस्य प्रो0 (डाॅ0) आलोक चैहान ने इसे एक परिवर्तनकारी कदम बताते हुए कहा, “अब हम अपने पाठ्यक्रमों को उद्योग की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप ढाल सकेंगे। इससे हमारे छात्र अधिक दक्ष, आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए तैयार बन सकेंगे।”

संस्थान के निदेशक प्रो0 (डाॅ0) डी. के. शर्मा ने कहा, *“यह उपलब्धि एबीईएस की टीम भावना, शिक्षकों की प्रतिबद्धता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का परिणाम है। अब हम परिणाम आधारित शिक्षा प्रणाली को और प्रभावी रूप से लागू कर पाएंगे।”*

इस अवसर पर मीडिया प्रभारी प्रो0 (डाॅ0) तरुण कुमार अरोड़ा ने सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह स्वायत्तता ए.बी.ई.एस. के लिए एक नई दिशा और गति लेकर आएगी।
स्वायत्त दर्जा मिलने से ए.बी.ई.एस. इंजीनियरिंग कॉलेज न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के अग्रणी तकनीकी संस्थानों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने की ओर अग्रसर है। यह उपलब्धि संस्थान के छात्रों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए गर्व का विषय है।

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