गाजियाबाद

युग परिवर्तन के लिए भौतिक और अध्यात्म का समन्वय जरूरी -महात्मा सारथानंद

आध्यात्मिक और समाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से नौका विहार में दो दिवसीय सद्भावना संत सम्मेलन के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे महात्मा सारथानंद जी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि सनातन धर्म श्रेष्ठ और अजर-अमर अविनाशी है, सबको जीवन देने वाला है, सबका मार्गदर्शक है, संस्कारों की जननी है। सनातन धर्म को जानना अत्यंत आवश्यक है। ज़ब हम सनातन को जानेंगे, सत्य को जानेंगे, अखंड और अमरत्व को जानेंगे, तब हमारे जीवन से अज्ञानतारूपी राक्षस समाप्त होगा, अज्ञानतारूपी रावण और कंस समाप्त होगा। इसी परिस्थितियों में हम राम राज्य के सपने को साकार कर सकते है।
महात्मा सारथानंद ने कहा कि आज हम सभी यह संकल्प ले कि हम यहां से सद्भावना का संदेश, महापुरुषों का संदेश जन-जन तक पहुचायेंगे औरभारत माता की सेवा करते हुए स्वर्णिम भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे। आध्यात्मवादी संतों के बताएं हुए मार्ग पर चल कर ही हम राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकते है। जिस प्रकार हम भौतिक विकास में अनवरत लगे हुए है उसी प्रकार हमें आध्यात्मिक विकास भी करना होगा, क्योंकि यह जीवन भौतिक और अध्यात्म दो पहिये की गाड़ी है। इसलिए भौतिक और अध्यात्म का समन्वय अति आवश्यक है।

समिति के जिला कुशीनगर प्रभारी महात्मा प्रज्ञा बाई जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे आराध्य पूज्य श्री सतपाल जी महाराज है जो हमें वास्तविक जीवन जीने की कला सिखाते है। संसार में सुई से लेकर हवाई जहाज तक प्रत्येक वस्तु बनाने की फैक्ट्री है लेकिन हमारे श्री महाराज जी मानव को महामानव बनने की युक्ति बताते है। जिसके अंदर मानवीय गुण होता है, वही मानव है और मानव बनाने की फैक्ट्री हमारे गुरु महाराज जी के पास है।

मंचासीन महात्मा अनुगीता बाई जी ने भी अपने सत्संग विचारों से सबको लाभान्वित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्रीमान सुरेश जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मंचासीन सभी पूज्य संतों के चरणों में दंडवत प्रणाम करता हूँ। उन्होंने कहा कि विश्व का सबसे बड़ा संगठन आरएसएस के 100 साल पुरे होने की सबको बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। साथ ही साथ उन्होंने संघ की विचार धाराओं से पांडाल में उपस्थित जन-मानस को अवगत कराया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला संघचालक माननीय श्री राम आश्रय जी, विभाग बौद्धिक शिक्षण प्रमुख श्रीमान सुरेश जी, जिला प्रचार प्रमुख श्रीमान ब्रजेश जी, समाजसेवी और कवि श्री नन्दलाल विद्रोही का समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा संस्था का साहित्य देकर, फूल-मालाओं और पटके पहनाकर उनका स्वागत किया गया। मंचासीन संत-महात्मागणों का स्वागत आगंतुक अतिथियों और समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा फूल-मालाओं से किया गया। इस दौरान सभासद जय प्रकाश सिंह, समाजसेवी पुरुषोत्तम गुप्ता, अवधेश सिंह, राजकुमार सिंह, शंकर सिंह, समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ता प्रभु सिंह, अयोध्या सिंह, संतोष सिंह, भरत जायसवाल, नित्यानंद तिवारी, चंद्रशेखर पाण्डेय, अजय त्रिपाठी, श्रवण सिंह सहित अनेक गणमान्य उपस्थित उपस्थित रहे। अनेक भजन गायक कलाकारों ने अपने सुमधुर भजनों से सबको भाव-विभोर कर दिया। समिति द्वारा इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले प्रशासन सहित क्षेत्रीय लोगों और प्रेमीभक्तों का आभार प्रकट किया गया। मंच संचालन धुरन्धर चौहान ने किया। आरती-प्रसाद और भंडारे के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

इस दो दिवसीय सद्भावना संत सम्मेलन के दूसरे दिन समिति के सैकड़ों भक्तों द्वारा पुरे फ़ाज़िलनगर कस्बे में सद्भावना यात्रा निकाल कर सद्भावना का संदेश दिया गया। राष्ट्रीय एकता और सद्भावना से ओत-प्रोत– श्री सतपाल जी महाराज का एक ही नारा-जागे भारत देश हमारा। जागे है जगायेंगे-आत्म ज्ञान फैलाएंगे। हमारा देश कैसा हो-रामराज्य जैसा हो। विश्व में शांति कैसे होगी- केवल आत्मज्ञान से। जैसे अनेक प्रकार के जयघोष और प्रेरणादायक भजन गाये गए। यात्रा का शुभारम्भ अयोध्या से पधारे समिति के वरिष्ठ महात्मा सारथानंद जी ने हरी झंडी दिखा कर किया, साथ में कुशीनगर प्रभारी महात्मा प्रज्ञा बाई जी और महात्मा अनुगीता बाई जी मौजूद रहें। सद्भावना यात्रा नौका विहार कार्यक्रम स्थल से प्रारम्भ होकर जैन मंदिर, कॉलेज रोड होते हुए फ्लाई ओवर के दक्षिण साइड से बड़े कट से पुरानी बाजार होते हुए फ्लाई ओवर के छोटे कट से बघौच मोड़ से पुनः कार्यक्रम स्थल नौका विहार में सम्पन्न किया गया। यात्रा के दौरान अनेक स्थानों पर यात्रा में उपस्थित संत-महात्मागणों का स्थानीय लोगों द्वारा फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button