राष्ट्रीय

मनुष्य जीवन का उदेश्य भगवान की प्राप्ति करना है – महात्मा प्रज्ञा बाई

महापुरुषों के बताएं हुए मार्ग का अनुशरण ही कल्याण कारी और सुखदायी है -महात्मा सारथानंद जी

फ़ाज़िलनगर। अखिल भारतीय आध्यात्मिक और समाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से नौका विहार में दो दिवसीय सद्भावना संत सम्मेलन के पहले दिन समिति के जिला कुशीनगर प्रभारी महात्मा प्रज्ञा बाई जी ने उपस्थित भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन का उदेश्य भगवान की प्राप्ति करना है। जीवन सुख-दुःख का संगम है। भगवान कहते है कि हानि-लाभ, जीवन-मरण, यश-अपयश ये सब विधाता के हाथ में है। कर्म केवल मनुष्य के हाथ में है। इसलिए हम सभी निस्वार्थ कर्म करें। भगवान को समझ कर, भगवान को समर्पित करके सभी सत कर्म करें जिससे हमारा यह लोक और परलोक दोनों सुधर जाएं। ज़ब हम भगवान को जानकर भक्ति करेंगे तो जीवन सफल हो जायेगा।

श्रीराम नगरी अयोध्या धाम से पधारे महात्मा सारथानंद जी ने सम्बोधित करते हुए कहा कि महापुरुषों के बताएं हुए मार्ग का अनुशरण करना ही हमारा उद्देश्य होना चाहिए क्योंकि ‘महाजनो येन गतः स पंथा’ जिस रास्ते पर महापुरुष चले, जिसका रास्ता हमें बताया है उसी का अनुशरण करना चाहिए उसी पर चलना चाहिए, इसी में हम सबका कल्याण है, वही सबके लिए हितकारी और सुखदायी है।

मंचासीन सहयोगी महात्मा अनुगीता बाई जी ने कहा कि जीवन से जो भी व्यक्ति दुखी हैं, उनके जीवन में कोई आनंद नहीं है। तो उनका मन डाइवर्ट करने के लिए चेंज करने के लिए जैसे आप लोग घर के अंदर कोई कार्यक्रम करते है, कभी वृंदावन घूम के आते है, बस मन थोड़ा चेंज हो जाएगा, हरिद्वार घूम के आएंगे, चारों धाम घूम के आएंगे, चारधाम करके आते हैं, यात्रा करके आते हैं, तीर्थस्नान करके आते हैं, भगवान श्री राम ने स्वयं इस मनुष्य शरीर को सर्वश्रेष्ठ बताया है, इस शरीर के अंदर ही परमात्मा का वास है, निवास है। इसी मनुष्य के हृदय के अंदर ही परमात्मा का दर्शन होता है। गुरु वशिष्ट जी भगवान राम को ब्रह्म का उपदेश कराते हैं, उस समय भगवान श्री राम अपने गुरु के चरणों में बैठकर के हाथ में ना कोई माल है, ना कोई पुष्प है, ना कोई धूप है, ना कोई अगरबत्ती है, ना कपूर है, अर्थात किसी भी प्रकार की सामग्री भगवान राम के हाथों में नहीं थी, ना कोई फोटो थी, ना किसी देवी-देवता की छवि थी। प्रभु ही गुरु रूप में आकर मनुष्य के हृदय के अंदर ही परमात्मा का दर्शन कराते हैं। इसलिए हम सभी को समय के सदगुरु की तलाश करके आत्म ज्ञान की प्राप्ति कर अपना कल्याण करना है।
कार्यक्रम में छात्र संघ अध्यक्ष सत्यम शुक्ला, नाथापट्टी के ग्राम प्रधान संजय चौरसिया, जोकवा के ग्राम प्रधान नागेंद्र गुप्ता, रामेश्वर सिंह, श्री रामनाथ सिंह, हरिहर गुप्ता, मत्स्यराज सिंह, डॉ राजेंद्र प्रजापति, शम्भू सिंह, नथुनी गुप्ता, श्रीकांत प्रजापति सहित सैकड़ों की संख्या में उपस्थित भक्तों ने कार्यक्रम से लाभ उठाया।
दूर-दूर आये भजन गायक कलाकारों ने अपने सुमधुर भजनों से सबको भाव- विभोर कर दिया। मंचासीन संत-महात्मा गणों सहित अनेक गणमान्य अतिथियों का स्वागत फूल-मालाओं से किया गया। मंच संचालन डॉ. संतोष यादव जी ने किया।

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