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मानव सौहार्द और विश्वबंधुत्व का अनूठा दृश्य-78वां निरंकारी संत समागम सम्पन्न

समालखा/बागपत,(आनन्द धारा न्यूज़)। समालखा में जारी 78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का दूसरा दिन आध्यात्मिकता और मानवता के अद्भुत संगम का साक्षी बना। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि “आत्ममंथन केवल सोचने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने की साधना है, जो परमात्मा के अहसास से सरल हो सकती है।” सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने कहा- आत्ममंथन से जीवन में आती है शांति और सहजता। निरंकारी राजपिता रमित जी ने बताया – परमात्मा एक सार्वभौमिक सत्य है, जो सबके लिए समान है। तीन भागों में विभाजित आकर्षक निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं का मुख्य आकर्षण बनी। एसएनसीएफ द्वारा समाज सेवा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर विशेष जानकारी प्रदर्शित।

सतगुरु माता जी ने कहा कि भावनाओं के अधीन होकर हम अक्सर सरल कार्यों को भी कठिन बना लेते हैं। लेकिन जब मन परमात्मा से जुड़ता है, तो अकर्ता भाव से मन शांत होता है और हर कार्य सहजता से पूर्ण होता है। उन्होंने कहा, “जीवन में हमें यह discern करना सीखना होगा कि कौनसी बातें हमें अपनानी हैं और कौनसी त्यागनी हैं। ब्रह्मज्ञानी व्यक्ति विवेकपूर्ण निर्णय लेकर अपने जीवन को शांति और सुकून से भर लेते हैं।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पहाड़ों पर हमारी आवाज़ गूंजकर लौट आती है, वैसे ही हमारा व्यवहार भी प्रतिध्वनि की तरह हमारे पास लौट आता है। इसलिए हमारे व्यवहार का स्वरूप ऐसा होना चाहिए कि उसकी प्रतिक्रिया हमारे लिए सुखदायी बने।

सतगुरु माता जी ने कहा कि “आत्ममंथन वास्तव में स्वयं के सुधार का मार्ग है। जब मन निरंकार से जुड़ता है, तो भीतर की शांति और बाहर का व्यवहार दोनों दिव्यता से भर जाते हैं।”

निरंकारी राजपिता रमित जी ने कहा कि धार्मिक क्षेत्र में परमात्मा के अनेक दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं, लेकिन परमात्मा एक सार्वभौमिक सत्य है – जो सदा से सत्य है और सदैव रहेगा। उन्होंने कहा कि जैसे सूर्य का पूर्व से उदय होना एक अपरिवर्तनीय सत्य है, वैसे ही परमात्मा का अस्तित्व भी शाश्वत है। उन्होंने कहा कि सतगुरु मानव को इस सत्य का बोध कराने के लिए ही पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और हर व्यक्ति को चाहिए कि वह समय रहते इस सत्य को पहचान ले। निरंकारी प्रदर्शनी – ज्ञान और प्रेरणा का संगम चार दिवसीय समागम में निरंकारी प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे आधुनिक तकनीक, प्रकाश व्यवस्था और मॉडल्स के माध्यम से अत्यंत रोचक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी को तीन हिस्सों में बाँटा गया है –
1. मुख्य प्रदर्शनी:मिशन का इतिहास, सतगुरु माता जी एवं राजपिता जी की यात्राएँ, और ‘आत्ममंथन’ विषय पर तीन मॉडल।
2. बाल प्रदर्शनी: बच्चों की शिक्षा, संस्कार और जीवन मूल्यों से जुड़ी शिक्षाप्रद झलकियाँ।
3. एसएनसीएफ प्रदर्शनी: समाज सेवा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़ी गतिविधियाँ, जैसे रक्तदान, स्वच्छता अभियान और सादा विवाह।

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