
गाजियाबाद, (सुशील कुमार शर्मा)। राजया स्वास्थ्य शिक्षा संस्थान द्वारा स्वामी भास्करानंद वैदिक थैरेपी सेंटर शास्त्री नगर (निकट डायमंड फ्लाई ओवर) में 16 नवंबर 2025 रविवार को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उद्देश्य था स्वास्थ्य के प्रति सतर्क नहीं शिक्षित बनें।यह थेरेपी सेंटर डॉ. राजीव बिश्नोई और डॉ. जया चौधरी के संचालन में कई वर्षों से काम कर रहा है।
डॉ. बिश्नोई ने बताया कि हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से 80 प्रतिशत अल्कलाइन और 20 प्रतिशत एसिडिक है। परंतु हम हर समय कार्बोहाइड्रेट ही ग्रहण करते रहते हैं जिसकी वजह से हमारे शरीर में एसिड बनता है और पीएच लेवल डाउन होने लगता है, हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 3000 तरह के एंजाइम बनते हैं लेकिन हम एसिडिक भोजन करके सबको समाप्त कर रहे हैं। केमिकल ड्रग्स एसिडिक है जो हमें बीमार करता है। हम अगर 80 और 20 प्रतिशत की मांग पर नहीं चल सकते तो हमें कम से कम 60 और 40 प्रतिशत अल्कलाइन और एसिडिक भोजन अवश्य ग्रहण करना चाहिए, उन्होंने कहा कि यदि हमारा शरीर स्वस्थ नहीं रहेगा तो हमारी नेगेटिव थिंकिंग बढ़ेगी और हार्मोन भी डिस्टर्व होंगे। जिसकी वजह से ना तो हम खुश रह पाते हैं और ना ही दुखी रह पाते हैं । ऐसे में हमारे मन और शरीर में एक उलझन हर समय बनी रहती है और हमारा ध्यान हमेशा अपनी कमजोरी की तरफ रहता है। यदि हम स्वस्थ भोजन ग्रहण करेंगे तो हम अपनी कमजोरी को भी अपनी ताकत बना सकते हैं। हम जो भी कुछ कहते हैं अगर वह हमारे शरीर के लिए उचित नहीं है तो हमारा शरीर उसे ग्रहण नहीं करता है। किसी न किसी रूप में उसे बाहर निकाल देता है । जैसे बुखार होना, दस्त होना,खांसी, जुकाम होना। इस तरह से हमारा शरीर हमारे अंदर जमे हुए टॉक्सिंस को बाहर निकाल कर हमारी बॉडी को डिटॉक्स कर देता है। डिटॉक्स करने के और भी तरीके हैं जैसे पंचकर्मा और प्राकृतिक चिकित्सा। हमें समय-समय पर प्राकृतिक चिकित्सा का उपयोग करते रहना चाहिए जिससे हमारा शरीर डिटॉक्स हो और हमारा जीवन स्वस्थ रहे।

योगाचार्य त्रयम्बकेश ने ब्लड प्रेशर हाई होने के कुछ कारण बताएं। जैसे- बहुत ठंडा पानी पीना, सर्दी में सर्द हवा में बाहर निकलना या ठंडा और गर्म होना, समय से खाना नहीं खाना,रात में देर से खाना और बाहर का खाना ज्यादा खाना । हाई बीपी को कम करने के लिए तनाव वाला काम ना करें, जंपिंग करें ,घास पर घूमें, पश्चिमोत्तानासन, अनुलोम-विलोम, शीतली चित्कारी प्राणायाम और चंद्रभेदी प्राणायाम करें। उन्होंने बताया कि जो साइलेंट अटैक आते हैं वह ज्यादातर लो बीपी के कारण आते हैं। इसके लिए घूमना, जॉगिंग, ताड़ासन ,तिर्यक ताड़ासन, भुजंगासन, सूर्य भेदी प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम, पश्चिमोत्तानासन,पूर्वोतानासन । यदि हम यह सब करते हैं तो हमारा ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है । उन्होने कहा वैसे तो अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सर्वप्रथम भोजन में बदलाव करें और उसके बाद योग। योग का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। इसे हमें समझना चाहिए।
कार्यक्रम में मंचासीन स्वामी रामेश्वरम महाराज, प्राकृतिक चिकित्सा के अनुभवी सेवानिवृत्त आई एफ एस विनोद कुमार विश्नोई, संचार- रत्न से सम्मानित डॉ. एम. के. सेठ, प्राकृतिक चिकित्सा से स्वस्थ हुए सुशील अग्रवाल व सत्येंद्र सिंह ने भी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत सारे उपाय बताए।
विनोद कुमार विश्नोई ने बताया कि उन्हें प्राकृतिक चिकित्सा का अनुभव 40 वर्ष पूर्व गोरखपुर आरोग्य मंदिर जो विट्ठल दास मोदी द्वारा 1940 में बनवाया गया था और उनका पूरा परिवार उस संस्थान के कार्य में लगा हुआ है, में जाकर हुआ। उन्होंने कहा कि सिर्फ यह शरीर ही हमारा है इस शरीर के अलावा इस दुनिया में और कुछ भी हमारा नहीं है। अपने शरीर पर ही हमारा अधिकार है। हमारे साथ ही शरीर भी समाप्त हो जाएगा तो अपने इस शरीर को स्वस्थ कैसे करें ।स्वास्थ्य कई तरह के हैं, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक । इसके लिए सबसे पहले हमें अपने शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक रखना होगा। स्वास्थ्य खराब होने के बहुत सारे कारण है जैसे हमें बाहर का और असमय भोजन करना। घर में जो भी खाना बच जाए उसे खाना । इसके लिए हमें सात्विक भोजन लेना होगा और समय का ध्यान रखना होगा । सात्विक भोजन में हम जितना प्राकृतिक भोजन ग्रहण करेंगे तो स्वस्थ रहेंगे। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 80 प्रतिशत भोजन काम करता है और 20 प्रतिशत योगासन और एक्सरसाइज सेे सात्विक भोजन में छिलके वाली दालें, सब्जी ,फल, दूध और घी हैंं। अनाज सात्विक भोजन में नहीं आता है। हमें अपने भोजन में एक बटा तीन भाग सात्विक और एक बटा तीन भाग तामसिक रखना चाहिए । छिलके समेत हम खाने का जितना प्रयोग करेंगे और अंकुरित का उतना ही हम बीमारियों से दूर रहेंगे। डॉ. एम. के. सेठ ने कहा कि समय और खाना दोनों हमारे लिए मेडिसिन का काम करते हैं । हमारा जीवन एक उत्सव है और हमें हर पल उस उत्सव को खुश होकर मनाना चाहिए । हमारा शरीर एक गाड़ी की तरह है इस गाड़ी को चलाने के लिए हमें इसे ठीक रखना पड़ेगा। सोने से पहले हमें बैली ब्रीदिंग करना चाहिए। हमारे शरीर के हर ऑर्गन्स के अलग-अलग फ्रीक्वेंसी है । हम जब रात में सोने के लिए जाते हैं तो एक कॉस्मिक एनर्जी से जुड़े हुए होते हैं ।अगर हम रात में अच्छी सोच और डीप ब्रीदिंग के बाद सोते हैं तो सुबह जब हम उठते हैं तो हमारे थॉट्स बदले हुए होते हैं और हमारा मन ध्यान में लगने लगता है।
स्वामी रामेश्वरम महाराज ने कहा कि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य के लिए है और हमारा शरीर प्रकृति से बनता है जो अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल हैं ।जब हमारे शरीर में यह तत्व संतुलित रहते हैं तो हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और जैसे ही यह तत्व असंतुलित होने लगते हैं हमारा शरीर रोग ग्रस्त होने लगता है। इसलिए अपने शरीर को संतुलन में और स्वस्थ रखने के लिए हमें इन पांचो तत्वों को भी संतुलित रखना होगा। इन तत्वों का संतुलन हमारे भोजन और नियमित दिनचर्या के ऊपर आधारित है। सुशील अग्रवाल ने कहा कि हमें बस 8,5,2,1,0 याद रखना चाहिए, 8 घंटे की नींद, पांच तरह के मौसम के फल, टीवी और मोबाइल का सिर्फ 2 घंटे का इस्तेमाल, 1 घंटे एक्सरसाइज और योगासन और जीरो फास्ट फूड। सत्येंद्र सिंह ने भी शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहले भोजन पर ही विचार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा हमारा उद्देश्य इस प्राकृतिक चिकित्सा के कार्यक्रम के द्वारा जन जागरण में उनकी दिनचर्या और भोजन के प्रति उन्हें जागरूक करना है। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों को पौधा देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में संजय बिश्नोई, पारुल बिश्नोई, रिंकी बिश्नोई ,पृथ्वी पाल बिश्नोई, शगुन विश्नोई ,सुशील कुमार, डॉ. पलक, धैर्य कुमार, वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार शर्मा, अर्चना शर्मा,निशा, वीरेंद्र और ईशा उपस्थित रहे।



