
गाजियाबाद,(आनन्द धारा न्यूज़)। इस विषय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अश्वनी शर्मा ने कहा कि भारत में खेलों को लेकर हमारी प्राथमिकताएँ लगातार भटकती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि एक विदेशी खिलाड़ी को भारत बुलाकर उसकी मूर्ति स्थापित की जाती है, उसी से उसका अनावरण कराया जाता है और पूरे आयोजन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, जबकि अपने देश के लिए वर्षों तक जी-जान से खेलने वाले खिलाड़ियों को अपेक्षित सम्मान तक नहीं मिल पाता।
अश्वनी शर्मा ने विशेष रूप से भारतीय फुटबॉल के गौरव, पूर्व कप्तान सुनील छेत्री का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश का प्रतिनिधित्व किया, युवाओं को प्रेरित किया और भारतीय फुटबॉल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई, फिर भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी हैं।

उन्होंने कहा कि यह विषय केवल एक सुनील छेत्री तक सीमित नहीं है। देश में ऐसे हजारों प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जो संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में अपनी प्रतिभा को पूरी तरह निखार नहीं पाते। यदि इन्हें समय पर सही प्रशिक्षण, बेहतर खेल ढांचा और पर्याप्त प्रोत्साहन मिले, तो यही खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े-बड़े नामों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
अश्वनी शर्मा ने यह भी कहा कि हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार लियोनेल मेसी से जुड़े आयोजन पर लगभग 150 करोड़ रुपये तक खर्च किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि से देश में कई आधुनिक खेल अकादमियाँ स्थापित की जा सकती थीं, हजारों युवाओं को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जा सकता था और ऐसे खिलाड़ी तैयार किए जा सकते थे, जो भविष्य में भारत का परचम विश्व मंच पर लहराने का कार्य करते।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सम्मान केवल नाम और चमक का नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण का होना चाहिए। सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ी भारतीय खेलों की आत्मा हैं और युवाओं के लिए आदर्श भी। उन्हें सम्मान देना केवल एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि देश की खेल संस्कृति और आत्मसम्मान का सम्मान है।
अंत में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम विदेशी सितारों की अंधी प्रशंसा से आगे बढ़कर अपने देश की प्रतिभाओं को पहचानें, उन्हें संसाधन दें और उनका सम्मान करें।
छेत्री जैसे खिलाड़ियों को अनेक सलाम, क्योंकि वही सच्चे अर्थों में देश के लिए खेलते हैं और आने वाली पीढ़ियों को दिशा देते हैं।



