राष्ट्रभाषा चेतना और स्वच्छता से पवित्रता’ पर आयोजन हुआ निबंध प्रतियोगिता में 52 छात्र-छात्राओं ने भागीदारी की

गाजियाबाद। 251 राष्ट्रभाषा स्वाभिमान और भागीरथ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में ’33वें अ. भा. हिंदी साहित्य सम्मेलन’ के पहले चरण का आयोजन भागीरथ पब्लिक स्कूल सभागार में हुआ। राजभाषा के स्वर्ण जयंती वर्ष में हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाने हेतु वक्ताओं ने सकारात्मक सुझाव प्रस्तुत किये। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हिंदी अनुराग और समग्र स्वच्छता के विचार को समर्पित इस आयोजन में गाजियाबाद एवं दिल्ली के कालेजों के छात्र-छात्राओं ने ‘स्वच्छता से पवित्रता’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता में सहभागिता की और समारोह में इंटर व डिग्री कालेजों के पहले तीन भागीदारों को प्रमाण-पत्र के साथ उपयोगी पुस्तकें और पत्रिकाएं दी गई, वहीं शेष सभी भागीदार छात्र-छात्राओं को भी प्रमाण-पत्र के साथ पुस्तक पत्रिका भेंट की गई।
सम्मेलन के प्रारंभ में संस्कार वैभव संस्था की सदस्याओं ने सरस्वती वंदना और हिंदी गीत की सुमधुर प्रस्तुति से साहित्यिक वातावरण विकसित किया। भागीरथ सेवा संस्था निदेशक अमिताभ सुकुल ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।
समारोह के मुख्य संयोजक उमाशंकर मिश्र ने विषय प्रवर्तन करते हुए हिंदी और स्वच्छता के विचार की विशद् व्याख्या की, वहीं श्रीमती आशा सक्सेना, ईभा प्रसाद, ऋतु जैन, प्रदीप शर्मा, मीना जैन, वीरज कुमार त्रिपाठी, जे.के. गौड़ और के.के. शर्मा आदि ने दोनों विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये। हिंदी को अपनाने, बच्चों को अच्छे संस्कार देने और नैतिक शिक्षा के माध्यम से आधुनिक तकनीक के सामाजिक खतरों से बचा जा सकता है। इसके लिए परिवार में बच्चों को भारतीय परंपरा, हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से अच्छे संस्कार देना आवश्यक है।
समारोह के मुख्य अतिथि वीरज त्रिपाठी, श्रीमती मीना जैन, प्रदीप शर्मा, जे.के. गौड़ ने यू.एस.एम. पत्रिका के ‘राष्ट्रभाषा विकास विशेषांक’ और प्रवीण पारखी के लघुकथा संग्रह ‘आंख की किरकिरी’ का लोकार्पण किया।
राष्ट्रगाना के साथ सम्मेलन के इस पहले चरण का समापन हुआ। सम्मेलन का दूसरा चरण 26 अक्टूबर को आयोजित होगा।





