14 जनवरी को अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सौम्य योग में मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व

षटतिला एकादशी का व्रत भी 14 जनवरी को ही रखा जाएगा
गाज़ियाबाद। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार इस वर्ष 14 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत और मकर संक्रांति का पर्व एक साथ ही मनाया जाएगा।
14 जनवरी दिन बुधवार को अनुराधा नक्षत्र मध्य रात्रि के बाद 3:03 बजे तक रहेगा। बुधवार को अनुराधा नक्षत्र होने से अमृत सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और सौम्य योग बनता है। इन शुभ योगों में मकर संक्रांति का पर्व जिसे उत्तरायण का पर्व भी कहते हैं ,मनाया जाएगा। 14 तारीख को अपराह्न 3:07 बजे सूर्य मकर संक्रांति में आ जाएंगे। मकर संक्रांति में आने पर उत्तरायण आरंभ हो जाता है। अर्थात सूर्य की गति उत्तर की ओर बढ़ने लगती है और दिन बड़ा होना आरंभ हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन एक माह से चला रहा मल मास समाप्तहो जाता है। मकर संक्रांति से ही वैवाहिक मुहूर्त, गृह प्रवेश संबंधी शुभ मुहूर्त आरंभ हो जाते हैं।
किंतु इस बार इन शुभ मुहूर्त में आरंभ होने में 15 दिन और लगेंगे।
क्योंकि शुक्र अर्थात तारा अस्त चल रहा है
जो 28 जनवरी को उदय होगा ।उसी के पश्चात समस्त शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।
14 जनवरी को ही षटतिला एकादशी व्रत सभी संप्रदायों के व्यक्तियों के लिए शुभ है। एकादशी प्रातः सूर्य उदय से शाम 17:52 बजे तक रहेगी। उसके पश्चात द्वादशी तिथि आएगी।इसलिए षट्तिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी को ही रखा जाएगा ।
षटतिला एकादशी में तिलों का छ: प्रकार से प्रयोग किया जाता है।
1.तिल से स्नान-प्रातः स्नान के जल में काले तिल मिलाकर स्नान करें।
इससे शरीर व मन दोनों की शुद्धि होती है।
2.तिल का उबटन ,लेपन:
स्नान से पहले तिल का उबटन शरीर पर लगाएँ। तिलों को पीसकर उबटन बनाकर प्रयोग करें।यह त्वचा रोग एवं पाप दोष नाशक माना गया है
3.तिल से हवन:घर या मंदिर में तिल, घी और समिधा से हवन करें।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय स्वाहा। इस मंत्र से और गायत्री मंत्र से हवन करने से ग्रह दोषों की शांति होती है।
- तिल का दान: काले तिल, तिल से बनी मिठाई, तिल का तेल, कंबल या वस्त्र ब्राह्मण, साधु, वृद्ध या निर्धन को दान करें।
यह दान और पुण्य कर्म शनि, राहु, केतु दोष शमन में अत्यंत प्रभावी होता है।
5 तिल का भक्षण:एकादशी पर फलाहार में तिल का लड्डू या तिल से बनी वस्तु ग्रहण करें। इस दिन अन्न निषिद्ध रहता है।
6.तिल से दीपदान:तिल के तेल का दीपक भगवान विष्णु या पीपल वृक्ष के नीचे जलाएँ।
संध्या समय दीपदान विशेष पुण्यकारी है।
मकर संक्रांति के दिन प्राय:घरों में मूंग अथवा उडद की दाल की खिचड़ी बनाई जाती है।
ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए।
क्योंकि इस बार षट्तिला एकादशी मकर संक्रांति के दिन ही पड़ रही है। और संक्रांति सूर्य का उत्सव है, इसमें समरसता के भाव को रखते हुए चावल,सब्जियां,दालें डाल करके जो खिचड़ी बनाई जाएगी उसमें चावल का तासीर बदल जाता है।
वैसे भी एकादशी व्रत करने वाले को इस दिन चावल नहीं खाना चाहिए।
किंतु जो लोग एकादशी का व्रत नहीं करते उनको खिचड़ी बनाकर खाने में कोई दोष नहीं है।
इस दिन गरीबों, विद्वानों और ब्राह्मणों को खाद्य वस्तुएं जैसे खिचड़ी, उड़द या मूंग की दाल, गुड़,मूंगफली, रेवड़ी, तिल से बनी मिठाइयां आदि और गर्म वस्त्र ,कम्बल, रजाई आदि दान करने का महत्व है।
षटतिला एकादशी को तिल से बना मिष्ठान, लड्डू मूंगफली रेवड़ी आदि का दान आदि 14 जनवरी को को करें और मकर संक्रांति से संबंधित दान दाल, खिचड़ी, गुड़ चावल, ग्राम , कंबल आदि का दान 15 जनवरी करना चाहिए।
पंडित शिवकुमार शर्मा, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु कंसलटेंट गाजियाबाद।



