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23 जनवरी को मनाया जाएगा बसंत पंचमी उत्सव

जानिए सरस्वती पूजन के शुभ मुहूर्त
शुक्र अस्त के कारण बसंत पंचमी पर अनबूझ विवाह मुहूर्त पर बहुत कम होंगे विवाह
पंडित शिवकुमार शर्मा

माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी अर्थात बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी। मां सरस्वती का जन्मदिन ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।
मां सरस्वती ज्ञान की देवी है, इसलिए विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों मे मां सरस्वती का पूजन और हवन होता है। इस दिन से वसंत ऋतु का आरंभ हो जाता है। प्रकृति जीवन्त हो उठती है। उद्यानों और खेतों में पीले पुष्पों से वातावरण महक उठता है। रबी की फसलें के खेतों में लहलहा उठती हैं।
बसंत पंचमी को शास्त्रों में श्री पंचमी, रतिकामोत्सव भी कहा जाता है।
भारत में घर-घर में मां सरस्वती का पूजन होता है और मां सरस्वती से सद्बुद्धि ,ज्ञान, विद्या आदि का वरदान मांगा जाता है।
इस दिन प्रात:काल घर के व्यक्ति और बालक अपने घरों में मां सरस्वती की मूर्ति पर सफेद अथवा पीले पुष्पों की माला चढ़ाएं ।सफेद अथवा पीले प्रसाद का भोग लगाएं।
इन मंत्रों में से किसी एक मंत्र का जाप करें और उस दिन से बच्चों को मां सरस्वती की प्रार्थना करने का आग्रह करें , आपका बालक नियमित उनकी पूजा करें । ऐसा करने से बालक बुद्धिमान, विद्यावान और कुशाग्र बुद्धि बन सकता है।
सरस्वती मां की पूजन के मंत्र ,श्लोक इस प्रकार है।
1.या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ॥
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।
2.ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
3.सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि।
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
4.नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि।
त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्या दानं च देहि मे॥
नियमित सरस्वती पूजन करने का संक्षिप्त क्रम इस प्रकार है:
प्रातःकालीन नित्य क्रिया करने के बाद स्नान आदि से शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र पहनें।माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अथवा पुष्पमाला चढाएं। मां सरस्वती को मिष्ठान का भोग लगाएं। सफेद या पीला मिष्ठान्न , मिश्री आदि का भोग लगाएं ।
उपरोक्त दिए गए मंत्र अथवा श्लोक में से किसी एक मंत्र अथवा श्लोक का जाप करें। और विद्या बुद्धि के लिए मां सरस्वती से प्रार्थना करें।
सरस्वती मां विद्या की देवी है। प्रतिदिन इसी प्रकार मां सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति का अथवा बालक का मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है।
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती का पूजन ,यज्ञ आदि करने के शुभ मुहूर्त
प्रातः काल 8:25 बजे से 9:53 बजे तक कुंभ लग्न स्थिर लग्न मेंसरस्वती पूजन के लिए बहुत अच्छा मुहूर्त है।
10:30 बजे से 12:00 बजे तक राहुकाल रहेगा,इसमें पूजन करना शुभ नहीं है।
12:54 बजे से 17:03 बजे तक वृषभ और मिथुन लग्न और रवि योग में मां सरस्वती का पूजन हवन आदि श्रेष्ठ रहेंगे।
बसंत पंचमी पर होली रखने का विधान
बसंत पंचमी पर्व होली से 40 दिन पहले आता है। लोक परंपराओं के अनुसार बसंत पंचमी को गांव में किसी विशेष स्थान को शुद्ध करके ग्रामीण होलिका दंड धरती में गाड़ देते हैं।
40 दिन तक गांव के बालक और युवा सूखी लकड़ियां,पत्तियां, उपले आदि वहां पर इकट्ठा करते रहते हैं। इन लोकाचारों से होली उत्सव के प्रति प्रत्येक व्यक्ति और बालक जागरूक रहता था।
होली दहन के समय उसे शास्त्रीय नियम के अनुसार जलाते हैं। यह आयोजन ग्रामीण परंपराओं का हिस्सा है। अब तो शहरों में तीन दिन पहले ही मिट्टी डाल करके होलिका रखते हैं।
बसंत पंचमी को अनबूझ विवाह मुहूर्त माना जाता है। किंतु इस बार शुक्रास्त के चलते विवाह बहुत कम होंगे। 28 जनवरी के बाद शुक्र उदय के पश्चात विवाह मुहूर्त आरंभ होजाएंगे।
मशीन पहुंचने के पावन अवसर पर
मां सरस्वती से अपने परिवार,समाज और राष्ट्र को पराक्रमशाली, बलशाली होने का वरदान मांगे।
पंडित शिवकुमार शर्मा,ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु कंसलटेंट, गाजियाबाद

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