
गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। जिले में हाउस टैक्स की बढ़ी हुई दरों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद अब समाप्त हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर निगम के फैसले को वैध ठहराते हुए इसके खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने 77 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि टैक्स वृद्धि की प्रक्रिया पूरी तरह से कानून के अनुरूप अपनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दरों में बढ़ोतरी के दौरान आवश्यक प्रक्रियाओं और नियमों का पालन किया गया तथा इसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई।
याचिकाकर्ताओं ने हाउस टैक्स वृद्धि को मनमाना और जनविरोधी बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने नगर निगम के अधिकार क्षेत्र और वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
अदालत के इस निर्णय के बाद नगर निगम द्वारा बढ़ाई गई हाउस टैक्स की दरें प्रभावी रहेंगी। अब शहर के लाखों संपत्ति मालिकों को संशोधित दरों के अनुसार टैक्स का भुगतान करना होगा।



