
नई दिल्ली,(सुशील कुमार शर्मा)। अद्विक पब्लिकेशन दिल्ली द्वारा लेखक मंच के अतर्गत ‘ 21वीं सदी की हिंदी कविता में स्त्री स्वर ‘ विषयक एक महत्वपूर्ण साहित्यिक सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र समकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री लेखन और उसके बदलते स्वरूप पर केंद्रित रहा, जिसमें गहन चिंतन और सार्थक संवाद देखने को मिला।
कार्यक्रम का आयोजन अद्विक पब्लिकेशन के प्रमुख अशोक कुमार गुप्ता के सानिध्य में किया गया। सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष चंदर ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात लेखिका सविता चड्ढा उपस्थित रहीं। मंच संचालन का दायित्व रिंकल शर्मा ने कुशलतापूर्वक निभाया।
इस अवसर पर पुस्तक लोकार्पण एवं परिचर्चा का आयोजन भी किया गया। रश्मि अभया की काव्य कृति ‘सुनो न’, डॉ. शालिनी अगम की ‘शालीना’ तथा उनकी अंग्रेज़ी पुस्तक ‘मेडिटेशन’ और सविता चड्ढा की ‘मेरी रेडियो कहानियां’ सहित कई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। वक्ताओं ने इन कृतियों को समकालीन साहित्य की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने 21वीं सदी में स्त्री की बदलती छवि और उसके सशक्त स्वर को रेखांकित किया। रश्मि अभया ने कहा कि आज स्त्री का स्वर उसकी स्वतंत्रता, चेतना और अस्मिता का परिचायक है, जो समाज को आईना दिखाने का कार्य कर रहा है। डॉ. शालिनी अगम ने अपने विचार रखते हुए कहा कि आज की नारी संकोच त्यागकर पूरी मुखरता से अपनी बात रख रही है।
विशिष्ट अतिथि सविता चड्ढा ने साहित्य में दहेज प्रथा जैसे सामाजिक मुद्दों तथा महिला लेखन की मजबूत उपस्थिति पर प्रकाश डाला। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि वर्तमान समय में पुरुष लेखक भी स्त्री विमर्श पर गंभीरता से और संवेदनशील ढंग से लेखन कर रहे हैं। ऋषि कुमार शर्मा और रिंकल शर्मा ने भी विषय की प्रासंगिकता और साहित्यिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी और श्रोता उपस्थित रहे, जिन्होंने सत्र को अत्यंत रुचि और सराहना के साथ सुना। कुल मिलाकर यह सत्र विचारोत्तेजक, सार्थक और साहित्यिक दृष्टि से उल्लेखनीय रहा।



