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जलवायु परिवर्तन एवं सामाजिक न्याय विषय पर अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

गाज़ियाबाद। रसायन विज्ञान विभाग एम. एम .एच. कॉलेज ,आई. सी.ए. एस. एस .आर. निक्सी दिल्ली, आई .आई. एम . नई दिल्ली व सेन्ट्रल बैंक के सहयोग से ” क्लाइमेट चेंज एण्ड सोशल जस्टिस चैलेंजेस एण्ड सैल्यूशंस्स आफ इन्वायरमेंटल जस्टिस ” ( जलवायु परिवर्तन एवं सामाजिक न्याय : चुनौतियां, समाधान एवं पर्यावरणीय न्याय ) विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के पहले दिन 27-2-026 को उद्घाटन सत्र में आमन्त्रित अतिथि प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह कुलपति गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर बी. डब्लू पाण्डेय डीन सेंटर फार हिमालयन स्ट्डीज दिल्ली, श्री रमनकान्त फाउण्डर नीर फाउण्डेशन दिल्ली,श्री अतुल , प्रोफेसर हीरामन तिवारी डायरेक्टर आई. सी. एस. एस. आर. प्रोफेसर आर .के .सोनी चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ, डा. एस. के . त्यागी एक्स डायरेक्टर सी .पी. सी .बी. ,अमित सक्सेना डी. आर. डी .ओ. उपस्थित रहे। संगोष्ठी का प्रारंभ दीप प्रज्जवन और सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात् महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह, प्रोफेसर आर. एस. यादव प्रोफेसर रोजी मिश्रा, प्रोफेसर शालू त्यागी, डा. अलका व्यास, डा. राजपाल त्यागी तथा हरिदत्त शर्मा ने पौधा देकर अतिथियों का स्वागत किया। तत्पश्चात् संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन अतिथियों के द्वारा किया गया।

संगोष्ठी का प्रारंभ प्रोफेसर ओलीम रूजीमुरादेव उज्बेकिस्तान की आभासी मंच पर उपस्थिति से हुई प्रोफेसर ओलीम रूजीमुरादेव आज के बीज वक्ता थे । अपने वक्तव्य में उन्होने कहा कि – ग्रीन हाउस इफेक्ट के परिणाम जलवायु परिवर्तन के रुप में सामने आ रहे हैं । संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह कुलपति गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय ग्रेटर नोएडा ने आज की सामाजिक अकादमिक महत्व की संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन और सामाजिक न्याय जैसे विषय पर बोलते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन विश्व के लिए बड़ा संकट है ।यह परिवर्तन पर्यावरण वित्त , स्वास्थ्य और कृषि जैसे जीविका के मूल आधार को कमजोर कर रहा है।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर बी डब्लू पाण्डेय डीन सेंटर फार हिमालयन स्ट्डीज दिल्ली,ने अपने वक्तव्य में कहा कि जलवायु परिवर्तन होता रहा है यह चक्र चलता रहता है। प्रकृति और पर्यावरण मनुष्य के जीवन का अनिवार्य तत्व है । भारत ही एक ऐसा देश है जहां नदी,तालाब,कुंआ ,पेड़ पौधों की पूजा होती है। इसी संस्कार से हम प्रकृति को बचा पायेंगे।
श्री अतुल कुमार जी ने कहा कि हमें प्रकृति से प्राप्त निश्चित संसाधनों का प्रयोग करना चाहिए अनधिकार दोहन विनाश का कारण है। माता भूमि पुत्रोहम् पृथिव्या: इस भाव से प्रकृति और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकेंगे।
श्री रमनकान्त फाउण्डर नीर फाउण्डेशन दिल्ली ने जलवायु परिवर्तन का कारण प्रदूषित हवा, पानी को मानते हुए कहा कि समय भयावह है आज मौसम का चक्र बिगड़ रहा है नदियां सूख रही हैं। ‘ बिन पानी सब सून ‘समय रहते चेतना होगा नहीं बहुत देर हो जायेगी।
इसके पश्चात् महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह ने अतिथियों का को शाल ओढ़ाकर तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

जलपानोपरान्त आडिटोरियम में प्रथम तकनीकी सत्र डा. एस के त्यागी की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। इस सत्र के वक्ता प्रोफेसर आर. के .सोनी चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय मेरठ ने – ” एडवांस आक्सीडेशन टेक्नोलॉजीस फार फार्मास्युटिकल एण्ड माइक्रो प्लास्टिक रिमूवल सपोर्टिंग क्लाइमेट अडाप्शन एण्ड एनवायरनमेंटल जस्टिस ” विषय पर अपना वक्तव्य दिया। इन्होंने प्रदूषण के लिए विशेष रूप से अस्पताल से उत्सर्जित पदार्थ तथा खेतों में इकट्ठे होने वाले प्रदूषित पदार्थ को जैसे – कीटनाशक, रासायनिक खाद मिट्टी को प्रदूषित कर रहे हैं।साथ ही प्रदूषित जल को शुद्ध करने के परंपरागत और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।
डा. एस. के. त्यागी डायरेक्टर सीपीसीबी,एम ओ ई एफ सी सी ने इण्टर लिंकेज भी/ डब्लू क्लाइमेट चेंज- एण्ड सोशल इन इक्वलिटी: की इशूस हेल्थ एण्ड इक्विटी क्राइसेस एण्ड द वे अहेड ” पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सरकार ने विविध तरीकों को अपनाया है किन्तु प्रदूषण को पूरी तरह से खत्म करने में असमर्थ रही। इन्होंने प्रदूषण का कारण –
परिवहन,पराली का जलना, इटोंके भट्टे , जनरेटर से उत्पन्न धुआं को माना साथ ही बताया कि दिल्ली एनसीआर, कानपुर, लखनऊ की एयर क्वालिटी बहुत खराब है बताने के साथ ही यह कहां कि स्वस्थ पर्यावरण हेतु सशक्त कदम उठाने होंगे।

” एरोसोल मेजरमेंट एण्ड कन्ट्रोल डिवाइसेज बार प्रोटेक्टिव कर्कर्स फ्राम एयर पलूटेंस इन इण्डियन मैन्यूफैक्चरिंग आप्रेशन ” विषय पर प्रोफेसर तरुन गुप्ता डिपार्टमेंट आफ सिविल इंजीनियरिंग आई . आई. टी .कानपुर ने पी. पी.टी.के माध्यम से एरोसोल ( वायुमंडल में घुले-मिले छोटे कण जो मानव आंखों से दिखाई नहीं देते) के बारे में बताते हुए कहा कि कहा कि इन कणों का जलवायु मौसम और स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही कारखानों में काम करने वाले को इन कणों से सुरक्षित रखने के लिए निर्मित उपकरणों पर चर्चा की।
प्रोफेसर योगेश त्यागी प्रिंसिपल डी. ए. वी .कालेज मु . नगर ने कहा पर्यावरण की सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य है। जरुरी है कि ” इको बैलेंस क्लाइमेट जस्टिस पर चर्चा होती रहनी चाहिए।
तत्पश्चात् प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह जी ने आर के सोनी, एस के त्यागी डा. अमित सक्सेना का स्मृति चिन्ह देकर और शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
डा. राजपाल त्यागी ने शाल और स्मृति चिन्ह देकर प्राचार्य को सम्मानित किया।सत्र की समाप्ति पर हरिदत्त शर्मा ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।संचालन डा. रितेश यादव तथा डा. रश्मि सिंह ने किया।

भोजनोपरान्त चार तकनीकी सत्र – आडिटोरियम,कुंअर बेचैन हाल,बी. सी ए विभाग और भौतिक विज्ञान विभाग में चलाते गये साथ ही आनलाइन सत्र भी संचालित हुए तथा शोध-पत्र प्रस्तु किए गये।

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