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अध्यात्म के प्रचार से विश्व में सद्भावना होगी : श्री सतपाल जी महाराज

मुरादनगर। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में गंग नहर स्थित सतलोक आश्रम में होली के पावन पर्व पर आयोजित दो दिवसीय सत्संग एवं सद्भावना समारोह का समापन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ हुआ। समारोह के अंतिम दिन सुविख्यात समाजसेवी एवं आध्यात्मिक गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने विशाल जनसमुदाय को संबोधित करते हुए अध्यात्म के महत्व पर प्रकाश डाला।

अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि आज केवल समाज ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया अशांति और तनाव से गुजर रही है। एक देश दूसरे देश के साथ युद्ध कर रहा है और चारों ओर अस्थिरता का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने कहा कि संतों ने सदैव समाज को अध्यात्म का मार्ग दिखाया है। संतों के वचनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि संत न होते तो यह संसार अशांति की आग में जलकर नष्ट हो जाता। आज आवश्यकता इस बात की है कि अध्यात्म ज्ञान का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि समाज, देश और विश्व में शांति, प्रेम और सद्भावना स्थापित हो सके।
उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्ममंथन करने का आह्वान करते हुए कहा कि हमें यह विचार करना चाहिए कि हमने अपनी आत्मा के उत्थान के लिए कितना समय दिया है। उन्होंने कहा कि हम भौतिक जीवन की व्यस्तताओं में इतने उलझ गए हैं कि आत्मिक उन्नति के लिए समय ही नहीं निकाल पाते। यही कारण है कि संतों को बार-बार इस संसार में आकर मनुष्य को सही मार्ग दिखाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने मन को अध्यात्म से जोड़कर ध्यान, भजन और सुमिरन करता है, तभी उसे वास्तविक आत्मिक लाभ प्राप्त होता है। केवल नारे लगाने या जयघोष करने से धर्म की विजय नहीं होती, बल्कि धर्म और अध्यात्म को अपने जीवन में उतारने से ही मन और जीवन में वास्तविक शांति आती है।
समारोह के दौरान पूज्य माता श्री अमृता जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। समाज में मर्यादाएं समाप्त होती जा रही हैं और नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज ऐसे भी उदाहरण सामने आ रहे हैं जहां बच्चे ही अपने माता-पिता के विरुद्ध खड़े हो रहे हैं। ऐसे समय में बच्चों को अच्छे संस्कार देने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को सत्संग और आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ें, ताकि उनमें अनुशासन, मर्यादा और संस्कार विकसित हो सकें तथा वे अपने माता-पिता और समाज के प्रति जिम्मेदार बनें।
कार्यक्रम की शुरुआत में महाराज श्री, पूज्य माता श्री अमृता जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का संस्था के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं द्वारा माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। सत्संग के दौरान भजन गायकों ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।
समारोह से पूर्व प्रातःकाल में संस्था के यूथ विंग और शाखा कार्यकर्ताओं द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सफाई अभियान भी चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
दोपहर के समय सत्संग से पूर्व गुरु महाराज जी, पूज्य माता जी सहित सभी संत-महात्माओं, बाईगणों तथा भक्त समुदाय ने एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर होली का उत्सव बड़े हर्षोल्लास और सौहार्द के साथ मनाया। इस अवसर पर आश्रम परिसर में रंगों और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संतोष यादव ने किया। समारोह में क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्तियों, संत-महात्माओं, संस्था के पदाधिकारियों और दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने पूरे आयोजन को अत्यंत भव्य और सफल बनाया।

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