Homeसामाजिक

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी- जितेन्द्र बच्चन

ग्रेटर नोएडा,(आनन्द धारा)। पत्रकार वेलफेयर एसोएिशन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने कहा है कि सरकार यह तो मानती है कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। लेकिन लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (प्रेस) को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है, इस पर वह कभी गंभीर नहीं दिखती। जबकि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मीडिया, पत्रकारिता की सुरक्षा व प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करके ही सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रख सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन बुधवार को अखिल भारतीय गूर्जर महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता बीएस रावत से देश में पत्रकारों पर हो रहे हमले व उनकी समस्याओं पर बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे जनप्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों के साथ मिलकर सरकार के समक्ष पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और उनकी मूलभूत समस्यों का मुद्दा उठाएं। क्योंकि पत्रकार जनता और सरकार के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है। एक जीवंत और स्वतंत्र पत्रकार सत्ता को जवाबदेह ठहराकर और हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज बनकर लोकतंत्र को मजबूत करता है। इसलिए उनके अधिकारों, समस्याओं और जरूरतों के लिए सामाजिक संगठनों को भी मीडिया के लिए संघर्ष करना चाहिए।
बच्चन ने कहा है कि जब एक पत्रकार समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे नहीं रहता तो देश के सामाजसेवी, बुद्धिजीवी और सामाजिक संगठनों क्यों पत्रकार हितों के लिए आगे नहीं आते? ऐसे तमाम सामाजिक संगठनों को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की गरिमा का सम्मान होना चाहिए। आखिर एक पत्रकार विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत और समर्पण के साथ निरंतर कार्य करता है तो क्या आम लोगों का यह फर्ज नहीं बनता कि वह विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को सरकार के समक्ष पत्रकारों का मुद्दा उठाने के लिए उन पर दबाव बनाए। उन्हें प्रेरित करे कि सरकार पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और उनके हितों के लिए प्रतिबद्ध हो।
अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने अपने एक्स हैडिंल के जरिए सरकार से भी मांग की है कि वह पूरे देश में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करे। एक पत्रकार को 20 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा दी जाए। युवा पत्रकारों को 10 हजार और वरिष्ठ पत्रकारों को 25 हजार रुपये प्रति माह गुजारा भत्ता मिलना चाहिए। साथ ही आवास विकास एवं विकास प्राधिकरण के माध्यम से पत्रकारों को रहने के लिए भवन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button