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आंबेडकर जी के बताये हुए रास्ते पर ही चलकर लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा

बसंत कुमार, वरिष्ठ भाजपा नेता व राष्ट्रवादी लेखक (डॉ आंबेडकर और राष्ट्रवाद), डॉ.भीमराव आंबेडकर, भारतीय संविधान के निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक, ने हमेशा संवाद और सहिष्णुता को लोकतंत्र का मूल आधार माना। हाल के दिनों में एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच उनके सम्मान को लेकर विवाद ने देश की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर डॉ. आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाया, जिससे संसद में अशांति फैली और कुछ सांसद घायल हो गए। 

डॉ. आंबेडकर के सम्मान पर विवाद
एनडीए गठबंधन पर आरोप लगाया गया कि उनके एक वरिष्ठ मंत्री ने डॉ. आंबेडकर का अपमान किया, जबकि विपक्ष ने दावा किया कि स्वतंत्रता के बाद 1947 से 1956 तक उनके योगदान को नजरअंदाज कर उनका अपमान किया गया। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली सवाल यह है कि क्या हम बाबा साहब के बताये हुए रास्ते पर चल रहे हैं? 

प्रधानमंत्री मोदी के कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. आंबेडकर के सम्मान में कई ऐतिहासिक पहल की हैं, जिनमें शामिल हैं:

1. डॉ. आंबेडकर की 125वीं जयंती पर विशेष सत्र: इस ऐतिहासिक अवसर पर संसद का विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उनके विचारों और योगदानों पर चर्चा की गई।

2. पंच तीर्थ का निर्माण डॉ. आंबेडकर के जीवन से जुड़े पाँच प्रमुख स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया गया, जिससे उनके योगदान को स्मरणीय बनाया गया। 

3. संविधान दिवस की शुरुआत: हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की गई, जो संविधान और डॉ. आंबेडकर के प्रति सम्मान व्यक्त करती है। 

संवाद का महत्व
डॉ. आंबेडकर ने हमेशा लोकतंत्र की सफलता के लिए संवाद को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा था कि मतभेदों को दूर करने के लिए सहिष्णुता और आपसी समझ जरूरी है। आज देश में चल रहे राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने के लिए उनकी इस शिक्षा को आत्मसात करना आवश्यक है। 
आगे का रास्ता 
राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप छोड़कर डॉ. आंबेडकर के विचारों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि असहमति के बावजूद कैसे संवाद और तर्क से समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। लोकतंत्र तभी सुरक्षित रहेगा जब हम उनके बताए रास्ते पर चलेंगे और समाज में समरसता बनाए रखेंगे। 

आज की परिस्थितियों में हमें डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरणा लेकर देश में राजनीतिक सौहार्द और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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