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‘सोच में आसमान’: सुरेन्द्र शर्मा की जादुई आवाज़ और शायरी में समाज के प्रति संवेदना और जिम्मेदारी का अद्भुत समन्वय

गाजियाबाद,(सुशील कुमार शर्मा)। रेल एन्क्लेव, प्रताप विहार, गाजियाबाद निवासी सुरेन्द्र शर्मा न केवल एक वरिष्ठ ग़ज़लकार हैं, बल्कि आवाज़ की दुनिया के उन अनमोल रत्नों में से एक हैं जिन्होंने रेडियो और दूरदर्शन पर चार दशकों से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उत्तर रेलवे के वरिष्ठ अनुभाग विद्युत अभियंता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह कविता-पाठ और मंचीय कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय हैं।

‘गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी’ और ‘राजधानी से’ जैसे कार्यक्रमों में पाश्र्व वाचन से चर्चित सुरेन्द्र शर्मा ने दूरदर्शन निर्मित वृत्तचित्रों, प्रोमो तथा आध्यात्मिक ऑडियो-वीडियो कैसेट्स में भी अपनी सशक्त आवाज़ से विशेष पहचान बनाई है।

उनकी हाल ही में प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह ‘सोच में आसमान’ को साहित्यिक जगत से विशेष सराहना प्राप्त हो रही है। देश के नामचीन कवियों एवं साहित्यकारों ने इसे आम आदमी की ज़िंदगी की सच्ची तस्वीर और समाज की संवेदनाओं का आइना बताया है।

वरिष्ठ कवि प्रवीण शुक्ल ने कहा कि *“यह संग्रह आम जीवन की संवेदनाओं का सहज, प्रभावी और मार्मिक प्रस्तुतीकरण है।”* वहीं डॉ. प्रणव भारती के अनुसार “सुरेन्द्र शर्मा की शायरी छोटी बहर में भी बड़े असर के साथ दिल को छू जाती है।”
साहित्यकार डॉ.रमा सिंह ने कहा कि “उनकी ग़ज़लें स्वप्निल कल्पनाओं के साथ यथार्थ का ऐसा समावेश हैं जो पाठकों को बांधकर ले जाती हैं।”
शायर डॉ. कृष्ण कुमार नाज के शब्दों में, “शर्मा जी की ग़ज़लों में भारतीय चिंतन, सामाजिक विडंबनाएं और भावनात्मक लगाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।” उन्होंने सुरेन्द्र शर्मा के इन शेरों का विशेष उल्लेख किया:

“सोच में आसमान रखिएगा, हौसले में उड़ान रखिएगा”
“मुश्किल में जब जां होती है, लब पर केवल मां होती है”
“संस्कारों की कमी है, बाप-बेटे में ठनी है”*
“जेब बस में कट गई अब गांव कैसे जाएंगे, यार अच्छा आपने दिल्ली घुमाया है हमें”
प्रख्यात शायर मासूम गाज़ियाबादी के अनुसार, “यह पुस्तक एक ओर जहां जादुई आवाज़ और शायरी के संगम से समाज को झकझोरती है, वहीं पाठकों को सोचने के लिए प्रेरित करती है।”
‘सोच में आसमान’ में कुल 140 ग़ज़लें हैं, जो समाज, संबंधों, जीवन संघर्षों और मूल्यों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं। शब्दांकुर प्रकाशन, मदनगीर, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक को पाठक शुरू करते ही अंत तक पढ़े बिना नहीं छोड़ पाएंगे।

साहित्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सुरेन्द्र शर्मा को गज केसरी साहित्य सुधाकर सम्मान, विश्व हिंदी गौरव सम्मान (टोकियो), ब्राह्मण शिरोमणि सम्मान, उत्तर रेलवे महाप्रबंधक पुरस्कार*, काव्य रश्मि सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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