शब्द, संस्कृति और कला का शौर्य — “राष्ट्रदेव श्रीराम” कार्यक्रम में उमड़ा राष्ट्रभाव

गाजियाबाद | रामलीला मैदान, कवि नगर में रविवार को आयोजित “राष्ट्रदेव श्रीराम” कार्यक्रम ने राष्ट्र-चेतना, संस्कृति और कला का अद्वितीय संगम प्रस्तुत किया। सुप्रसिद्ध कवि, लेखक, गायक एवं चित्रकार बाबा सत्यनारायण मौर्य की ओजस्वी उपस्थिति ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

यह आयोजन आगामी रामकथा (25 जनवरी से प्रारंभ) की भावभूमि तैयार करने हेतु एक प्री-प्रोग्राम था, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से राममय बना दिया। कार्यक्रम का संचालन मंगलमय परिवार के तत्वावधान में हुआ।

कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ
- शुभारंभ युवा बालकों द्वारा दीप-योग एवं योग प्रदर्शन से हुआ, जिसकी अनुशासित प्रस्तुति ने दर्शकों से खूब तालियाँ बटोरीं।
- इसके बाद भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री मयंक गोयल ने साध्वी ऋतंभरा जी की प्रसिद्ध कविता “हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन” का सशक्त पाठ कर वातावरण को राममय कर दिया।
- कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सचिन सिंघल ने “मंगलमय परिवार” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए पारिवारिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रधर्मी मूल्यों को रेखांकित किया।
- संयोजक श्री मनीष अग्रवाल ने सभी अतिथियों, कलाकारों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया।
बाबा मौर्य की प्रस्तुति
बाबा सत्यनारायण मौर्य जी ने गीत, कविता और लाइव पेंटिंग को एक साथ प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। मंच पर बनती उनकी जीवंत चित्रकृतियों ने राष्ट्रभाव को साकार रूप दिया।
समापन
कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित जनसमूह भावावेश में झूम उठा।
बाबा मौर्य की ओजस्वी वाणी, सशक्त कला और जीवंत प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि शब्द, संस्कृति और कला आज भी राष्ट्र को जोड़ने की सबसे प्रभावी शक्ति हैं।




