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बाघ के आतंक से कांप रहा महसी: पांच दिन, दो हाथी और भारी फोर्स… फिर भी पकड़ से बाहर ‘शिकारी’, कॉम्बिंग जारी

बहराइच/महसी,(आनन्द सागर मिश्र)। जिले का महसी इलाका इन दिनों एक आक्रामक बाघ के आतंक के साये में जी रहा है। तहसील महसी के रेहुआ मंसूर गांव में पिछले चार दिनों से एक बाघ ने डेरा डाल रखा है। तीन दिन पहले एक.विशालकाय सांड को शिकार बनाने के बाद वन विभाग ने यहां अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।

चंपाकली और जयमाला का मोर्चा:


बाघ को गन्ने के 10-12 फीट ऊंचे खेतों से बाहर निकालने के लिए दुधवा नेशनल पार्क से दो विशेष प्रशिक्षित हाथियों, ‘चंपाकली’ और ‘जयमाला’, को बुलाया गया है। आज चौथे दिन भी इन हाथियों ने विशेषज्ञों के साथ घने खेतों में कॉम्बिंग की। दुर्गम रास्तों और बाघ की चालाकी के कारण शाम तक चली इस मशक्कत के बाद भी हाथियों की टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।

मौके पर डटे अधिकारी:

ऑपरेशन की गंभीरता को देखते हुए सीओ महसी और एसएचओ रामगांव भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद हैं। वन विभाग की ओर से क्षेत्रीय रेंजर साकिब अंसारी और वन दरोगा प्रशिक्षण वर्मा अपनी टीमों के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें थर्मल ड्रोन कैमरों के जरिए बाघ की हर हरकत पर नजर रख रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई है ताकि बाघ आबादी की ओर न बढ़ सके।

अधिकारियों का आश्वासन और अपील:

सीओ महसी और एसएचओ रामगांव ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और वन विभाग के कार्य में सहयोग करने की अपील की है। वन विभाग ने आश्वासन दिया है कि बाघ को जल्द ही ट्रंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया जाएगा। प्रशासन ने हिदायत दी है कि ग्रामीण अकेले खेतों की ओर न जाएं और रात के समय समूह में रहें।

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