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महान राष्ट्रनायक महाराणा संग्राम सिंह (राणा सांगा) के प्रति अपमान जनक टिपण्णी

गाजियाबाद। भारत की संसद के उच्च सदन में समाजवादी पार्टी के नेता श्री रामजीलाल सुमन ने अपमान जनक टिप्पणी उस महान योद्धा के विषय में की जिसकी गौरव गाथा को जन जन के ह्रदय में अस्सी घाव लगे थे तन में। फिर भी व्यथा नहीं थी मन में” जैसे लोकगीतों को गाये जाने के साथ जिन्दा रखा हुआ है। जिस पराक्रमी देश भक्त, राष्ट्र नायक ने विदेशी आक्रांताओं को अनेक बार देश से बाहर खदेड़ कर अपनी वीरता का लोहा मनवाया। राणा सांगा के पूर्वज बाप्पा रावल से लेकर, विश्व विख्यात महाराणा प्रताप सहित मेवाड़ के महाराणा हजारों वर्ष तक देश की स्वतंत्रता के लिए विदेशी आक्रमणकारियों का मुकाबला करते रहे हैं।

“मुझे न जाना गंगासागर। मुझे न रामेश्वर काशी। तीर्थराज चित्तौड़ देखने को मेरी आँखें प्यासी “

ऐसे देश भक्त, परम प्रतापी राष्ट्रनायक, महान योद्धा के प्रति अपमान जनक बातें संसद के उच्च सदन में सुनकर सम्पूर्ण देशप्रेमियों में रोष व्याप्त है। हम उनके कथन पर अपना गहरा रोष पृकट करते हुए उनका घोर विरोध करते हैं साथ ही हमारी मांग है कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए श्री रामजीलाल सुमन के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्यवाही की जाए।

अखिल भारतीय क्षत्रिय सभा गाजियाबाद एवं महाराणा प्रताप स्मृति निर्माण समिति गाजियाबाद द्वारा जिलाधिकारी गाजियाबाद को ज्ञापन दिया गया। रामदेव सिंह रावल पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक हरपाल सिंह चौहान संरक्षक प्रमोद सिसोदिया, कार्यवाहक अध्यक्ष नीता सिंह, महामंत्री भूपेंद्र चौहान, कोषाध्यक्ष राजकुमार सिंह बैस, युवा अध्यक्ष देव पाल सिंह, नाग प्रदीप सिसोदिया, राकेश चौहान, ओमपाल चौहान, जेपी राणा,आरपी सिंह, जादौन पंकज सिंह, महेश सिसोदिया, नरपल सिंह, राम अवतार चौहान, वीरेंद्र चौहान, परविंदर शेखावत, हरि सिंह नगलक्ष्या, रमेश राघव, प्रदीप सोलंकी, वरुण पुंडीर अनिल खेड़ा विपिन तोमर भानु सिसोदिया हेमंत सिसोदिया, नंदकिशोर वर्मा, जय नारायण, अभिजीत सिंह अनेक राजपूत उपस्थित रहे।

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