
गाज़ियाबाद,(आनन्द धारा न्यूज़)। शिक्षा ही वह साधन है जो किसी भी राष्ट्र को विश्व गुरु बना सकता है। यह तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित बच्चों तक शिक्षा का प्रकाश पहुँचे। इसी उद्देश्य को लेकर पावन चिंतन धारा आश्रम के संस्थापक डॉ. पवन सिन्हा ‘गुरूजी’ ने अनौपचारिक विद्यालय के रूप ‘ऋषिकुलशाला’ प्रकल्प आरंभ किया।
गाज़ियाबाद के पिपलेश्वर महादेव मंदिर, राजनगर एक्सटेंशन में इसका वार्षिकोत्सव मनाया गया। गौरतलब है कि वर्ष 2011 में एक कमरे से शुरू हुई ऋषिकुलशाला की यह यात्रा 2019 में नई ऊँचाई पर पहुँची, जब तत्कालीन राष्ट्रपति माननीय श्री रामनाथ कोविंद जी ने इसके विस्तार योजना का विधिवत उद्घाटन किया। वर्तमान में ऋषिकुलशाला देश के 9 राज्यों में 25 केंद्रों के माध्यम से 2500 से अधिक बच्चों को शिक्षा और संस्कार प्रदान कर रही है। इसका उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में आत्मविश्वास जगाना, उन्हें सम्मान देना और समाज में भेदभाव मिटाकर जिम्मेदार नागरिक बनाना है।
ऋषिकुलशाला वार्षिकोत्सव में महिंद्रा एंक्लेव-शास्त्री नगर, गोविंदपुरम और राजनगर एक्सटेंशन केंद्रों के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं।

छोटे बच्चों द्वारा मंत्रोपचार के साथ सूर्य नमस्कार की अदभुद प्रस्तुति के साथ गीत गायन एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि यदि इन बच्चों को भी उचित प्रशिक्षण और साधन मिले तो ये भी बहुत कुछ कर सकते हैं और देश के निर्माण में योगदान दे सकते हैं। बच्चों का उत्साह देख कर दर्शक भावविभोर हो उठे।
डॉ. पवन सिन्हा ‘गुरूजी’ ने अपने संबोधन में कहा कि “आज भी देश में साढ़े चार करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। उनकी आँखों में सपनों की रौशनी है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह बुझने न पाए। समाज का हर वर्ग आगे आए और इन बच्चों की शिक्षा में सहयोग देकर सच्चा राष्ट्रभक्त बने।” ज्ञातव्य हो कि ऋषिकुलशाला जहाँ एक ओर राजधानी दिल्ली की बस्तियों में शिक्षा और संस्कार पहुंचा रहा है वहीं दूसरी ओर बिहार के सिवान के एक मुसहर टोला गाँव जहाँ अत्यंत गरीबी है, वहाँ के बच्चों को भी आपने सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसलिये ऋषिकुलशाला का लक्ष्य है कि शिक्षा, संस्कार और कौशल विकास की यह ज्योति देश के हर बच्चे तक पहुँचे और भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर तथा संस्कारवान राष्ट्र बनाने में योगदान दे। इन बच्चों के सुदृढ़ भविष्य के लिए भिक्षाटन भी करना पड़े तो भी संकोच नहीं करें अर्थात यथासम्भव सहयोग करना ही है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में ऑल इंडिपेंडेंट स्कूल ऑफ़ फेडरेशन के अध्यक्ष रामावतार जिंदल, वरिष्ठ समाजसेवी अनिल साँवरिया, देवेंद्र हितकारी, मंदिर समिति के अनिल तोमर, अनिल शर्मा तथा राजीव त्यागी, श्रीमती बबिता त्यागी उपस्थित रहे।

अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और ऋषिकुलशाला द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। साथ ही इस पुनीत कार्य हेतु यथासंभव योगदान का आश्वासन भी दिया।



