
नई दिल्ली,(आनन्द धारा)। अखंड भारत मिशन के संस्थापक अश्वनी शर्मा ने कहा है कि देश को आज योगी आदित्यनाथ और संजय भाई जोशी जैसे नेताओं से ही उम्मीद बची है और अब ऐसे नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने विभिन्न राजनीतिक दलों को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्हें नजरअंदाज करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए आसान नहीं होगा।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि यह बुद्धिजीवी और राष्ट्रवादी वर्ग है, जो व्यक्तिगत हितों से पहले राष्ट्र को रखता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ग की राष्ट्रहित के प्रति प्रतिबद्धता को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब योगी आदित्यनाथ और संजय भाई जोशी जैसे नेताओं को पर्याप्त अवसर और जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। राजनीतिक दलों को अपने समर्पित, वैचारिक और राष्ट्रवादी कार्यकर्ताओं की भूमिका को समझना होगा तथा ऐसे लोगों की क्षमता और अनुभव का उपयोग राष्ट्रहित में करना चाहिए।
शर्मा ने जंतर-मंतर पर आरक्षण और यूजीसी एक्ट के विरोध में चल रहे आंदोलन को गंभीरता से लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐसे आंदोलनों को हल्के में लेना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ी भूल साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से पहले भी उनके द्वारा सत्ता में बैठे लोगों को सावधान रहने की हिदायत दी गई थी।
ओम प्रकाश राजभर के बयान का किया समर्थन

हाल ही में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के संस्थापक ओम प्रकाश राजभर द्वारा आरक्षण को लेकर दिए गए बयान का उल्लेख करते हुए अश्वनी शर्मा ने कहा कि उन्हें लगा कि कम से कम किसी ने एक वास्तविक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात की है।
ज्ञात हो कि ओम प्रकाश राजभर ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसी आईएएस, आईपीएस या अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी के बच्चों को लगातार आरक्षण का लाभ मिलता रहेगा, तो इस बात पर भी विचार होना चाहिए कि उसी वर्ग के अन्य जरूरतमंद लोगों को अवसर कैसे मिले, जो अभी भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पीछे हैं।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि ऐसे विषयों पर समाज के सभी वर्गों में गंभीर, तार्किक और व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां सामान्य वर्ग के कई राजनीतिक नेता ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए हैं, वहीं ओम प्रकाश राजभर द्वारा इस विषय को उठाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण जैसे संवेदनशील विषयों पर राजनीति से आगे बढ़कर व्यापक सामाजिक विमर्श और न्यायपूर्ण व्यवस्था पर विचार करने की आवश्यकता है। राजनीतिक दलों को बुद्धिजीवी और राष्ट्रवादी वर्ग की भावनाओं और आवाज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए तथा समय रहते जनता की बदलती सोच और अपेक्षाओं को समझना चाहिए।
अश्वनी शर्मा ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाले लोगों की भूमिका केवल चुनाव के समय तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि देश की नीतियों और भविष्य की दिशा तय करने में भी ऐसे वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “केवल राजनीतिक समीकरण साधने के चक्कर में जातिवादी राजनीति करना गलत है। राजनीतिक दलों को तात्कालिक राजनीतिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित, योग्यता और व्यापक सामाजिक हित को प्राथमिकता देनी चाहिए।”



