
नई दिल्ली,(सुशील कुमार शर्मा)। वरिष्ठ साहित्यकार और प्रवासी कथाकार तेजेंद्र शर्मा ने अपने जीवन के 74 वर्ष पूरे कर 75वें वर्ष में प्रवेश किया। इस अवसर पर अद्विक प्रकाशन की ओर से उनकी दो पुस्तकों के पोस्टर जारी किए गए। इनमें कहानी संग्रह ‘बेबसी की दास्तां’ और संपादकीय संग्रह ‘अपनी बात’ शामिल हैं। दोनों पुस्तकें तेजेंद्र शर्मा के साहित्यिक सरोकारों, संवेदनशील दृष्टिकोण और बहुआयामी व्यक्तित्व को सामने लाती हैं।
तेजेंद्र शर्मा लंबे समय तक लंदन से प्रकाशित ऑनलाइन पत्रिका पुरवाई के संपादक रहे हैं। अपने संपादकीय लेखन के माध्यम से वह भारत सहित वैश्विक परिदृश्य से जुड़े जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं। उनके लेखों में सामाजिक समस्याओं, सरकारी नीतियों और समसामयिक विषयों पर संवेदनशीलता के साथ बेबाक विचार प्रस्तुत किए जाते हैं। ‘अपनी बात’ में पुरवाई पत्रिका के लिए लिखे गए संपादकीय संकलित किए गए हैं। इस पुस्तक में संपादकीय श्रृंखला के छठे खंड को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
बीमारियों और मानवीय पीड़ा को रेखांकित करता कहानी संग्रह

तेजेंद्र शर्मा का कहानी संग्रह ‘बेबसी की दास्तां’ अपने विषय और दृष्टिकोण के कारण विशिष्ट है। इसमें आधुनिक जीवनशैली, भागदौड़, मानसिक तनाव और बदलती सोच से जुड़ी परिस्थितियों के बीच गंभीर बीमारियों और उनसे जूझते लोगों की पीड़ा को कहानियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।
आज विज्ञान और चिकित्सा तकनीक ने मानव जीवन की अवधि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन गंभीर बीमारियों के उपचार की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। कैंसर, मधुमेह, बोन मैरो ट्रांसप्लांट, कीमोथेरेपी और डायलिसिस जैसी जटिल चिकित्सा प्रक्रियाओं से गुजरने वाले मरीजों की परिस्थितियों को संग्रह में संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। इन कहानियों के माध्यम से बीमारी, जीवन की अनिश्चितता और मानवीय विवशताओं जैसे पहलुओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
इस कहानी संग्रह की भूमिका जाने-माने लेखक सूर्यकांत शर्मा ने लिखी है।
साहित्यकारों की रही विशेष उपस्थिति
पुस्तकों के आवरण पोस्टर जारी किए जाने के अवसर पर साहित्य जगत की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें वरिष्ठ साहित्यकार लालित्य ललित, वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर सत्यकेतु, युवा साहित्यकार रणविजय राव, वरिष्ठ कवि, लेखक एवं समीक्षक सूर्यकांत शर्मा, हंस पत्रिका की सहायक संपादक शोभा अक्षर, वरिष्ठ कथाकार संदीप तोमर और अद्विक प्रकाशन के निदेशक अशोक गुप्ता शामिल रहे।

दोनों पुस्तकों के माध्यम से तेजेंद्र शर्मा के साहित्यिक योगदान के अलग-अलग पक्ष सामने आते हैं। जहां ‘अपनी बात’ समकालीन मुद्दों पर उनके संपादकीय दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है, वहीं ‘बेबसी की दास्तां’ बीमारी और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े अनुभवों को कहानी के माध्यम से अभिव्यक्त करती है।



