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UP MLC चुनाव: कौन डाल सकता है वोट? स्नातक और शिक्षक सीटों के नियम जानिए

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्य (MLC) के चुनाव को लेकर मतदाताओं के बीच कई सवाल हैं। खासकर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर लोग जानना चाहते हैं कि इन दोनों सीटों में क्या अंतर है, कौन व्यक्ति वोट डालने का पात्र है और इसके लिए कौन-सी शर्तें पूरी करनी होती हैं। विधान परिषद के इन चुनावों की खास बात यह है कि इनमें आम विधानसभा चुनाव की तरह सभी मतदाता मतदान नहीं करते, बल्कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत लोग ही वोट डाल सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों सहित कुल 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान निर्धारित है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में कई-कई जिले शामिल होते हैं। इसलिए एक जिले के मतदाता अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के आधार पर मतदान करते हैं। गाजियाबाद इसका उदाहरण है, जहां मेरठ खंड स्नातक और मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मतदाता रहते हैं।

क्या होती है स्नातक MLC सीट?

स्नातक निर्वाचन क्षेत्र विधान परिषद की ऐसी सीट होती है, जिसके लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता रखने वाले मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों को विधान परिषद में अपना प्रतिनिधि चुनने का अवसर देना है। इस व्यवस्था में मतदाता का किसी विशेष पेशे से जुड़ा होना जरूरी नहीं है। डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, शिक्षक, व्यापारी, नौकरीपेशा व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता या अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले लोग भी पात्रता पूरी करने पर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता बन सकते हैं।

हालांकि, केवल स्नातक की डिग्री होना पर्याप्त नहीं है। संबंधित व्यक्ति को कानून में निर्धारित अन्य शर्तें भी पूरी करनी होती हैं और उसका नाम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए।

स्नातक सीट पर वोट देने के लिए प्रमुख शर्तें

पहली शर्त यह है कि व्यक्ति भारत का नागरिक हो और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता हो। दूसरी शर्त के अनुसार, उसके पास भारत के किसी विश्वविद्यालय की स्नातक डिग्री या कानून के तहत मान्य समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि निर्धारित अर्हता तिथि से कम-से-कम तीन वर्ष पहले उसने यह योग्यता प्राप्त कर ली हो। इसके अतिरिक्त उसका नाम संबंधित स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।

इसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति हाल ही में ग्रेजुएशन पास हुआ है, तो वह केवल डिग्री के आधार पर तुरंत मतदान का पात्र नहीं बन जाता। उसे निर्धारित समय-सीमा और पंजीकरण संबंधी नियमों को भी पूरा करना होगा।

क्या होती है शिक्षक MLC सीट?

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र विधान परिषद की ऐसी सीट होती है, जिसके लिए निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले शिक्षक अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षण क्षेत्र से जुड़े लोगों को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व प्रदान करना है, ताकि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों से संबंधित विषयों पर उनकी आवाज सदन तक पहुंच सके।

हालांकि, किसी स्कूल या कॉलेज में नौकरी करना अपने आप में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का अधिकार नहीं देता। इसके लिए अध्यापन के अनुभव, संबंधित संस्थान की पात्रता और मतदाता सूची में पंजीकरण की शर्तें पूरी करनी होती हैं।

शिक्षक सीट पर वोट देने के लिए प्रमुख शर्तें

नियमों के अनुसार, संबंधित व्यक्ति भारत का नागरिक हो और निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता हो। उसे निर्धारित अर्हता तिथि से पहले के छह वर्षों के दौरान कुल मिलाकर कम-से-कम तीन वर्ष तक पात्र शैक्षणिक संस्थान में अध्यापन का अनुभव होना चाहिए। संबंधित संस्थान को कानून में निर्धारित मानकों को पूरा करना आवश्यक है। सामान्य रूप से इसमें माध्यमिक विद्यालय से कम स्तर के संस्थान में अध्यापन को पात्रता के लिए पर्याप्त नहीं माना जाता।

इसके साथ ही शिक्षक का नाम संबंधित शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए। शिक्षण अनुभव की पुष्टि के लिए निर्धारित प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए केवल शिक्षक के पद पर कार्यरत होने या किसी संस्थान में नियुक्ति होने से मतदान का अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता।

स्नातक और शिक्षक MLC में क्या है मुख्य अंतर?

दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में सबसे बड़ा अंतर मतदाता की पात्रता का है। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का आधार निर्धारित शैक्षिक योग्यता और उसे प्राप्त किए हुए कम-से-कम तीन वर्ष का समय है। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान का आधार निर्धारित अवधि के भीतर पात्र संस्थान में अध्यापन का आवश्यक अनुभव है।

स्नातक सीट के लिए व्यक्ति किसी भी पेशे में काम कर सकता है, बशर्ते वह सभी कानूनी शर्तें पूरी करता हो। इसके विपरीत शिक्षक सीट के लिए निर्धारित शिक्षण अनुभव और संस्थान की पात्रता महत्वपूर्ण है। दोनों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां होती हैं और संबंधित सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है।

इन निर्वाचन क्षेत्रों की पात्रता का आधार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 27 में निर्धारित है।

क्या एक व्यक्ति दोनों सीटों पर वोट डाल सकता है?

हां, कोई व्यक्ति दोनों निर्वाचन क्षेत्रों की पात्रता पूरी करता है और दोनों की मतदाता सूचियों में उसका नाम दर्ज है, तो वह स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों के चुनाव में मतदान कर सकता है। उदाहरण के तौर पर, कोई व्यक्ति स्नातक डिग्री रखने के साथ-साथ निर्धारित अवधि का पात्र शिक्षण अनुभव भी रखता है, तो वह दोनों सूचियों में पंजीकरण के लिए पात्र हो सकता है।

लेकिन यदि उसका नाम केवल स्नातक मतदाता सूची में दर्ज है, तो वह शिक्षक सीट के लिए मतदान नहीं कर सकता। इसी तरह, केवल शिक्षक मतदाता सूची में नाम होने से स्नातक सीट पर वोट देने का अधिकार नहीं मिलता। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए पात्रता और पंजीकरण अलग-अलग जांचे जाते हैं।

गाजियाबाद में किन MLC सीटों के लिए मतदान होता है?

गाजियाबाद जिले के संबंधित मतदाता मेरठ खंड स्नातक और मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े हैं। इन निर्वाचन क्षेत्रों में गाजियाबाद के अलावा मेरठ, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जैसे जिले भी शामिल हैं।

इसका मतलब है कि गाजियाबाद में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति इन सीटों के लिए मतदान नहीं कर सकता। वोट डालने के लिए उसकी निर्धारित पात्रता पूरी होनी चाहिए और उसका नाम संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए।

यूपी में कुल 11 MLC निर्वाचन क्षेत्र कौन-कौन से हैं?

उत्तर प्रदेश में स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की पांच सीटें लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी हैं। वहीं, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की छह सीटें लखनऊ, आगरा, मेरठ, वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद हैं।

इन निर्वाचन क्षेत्रों में अलग-अलग जिलों को शामिल किया गया है। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदाता सूची और मतदान केंद्र निर्धारित होते हैं। इसलिए मतदाताओं को चुनाव से पहले अपनी पात्रता और संबंधित सूची में नाम की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

23 अक्टूबर 2026 के चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक निर्धारित है। मतगणना 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। चुनाव के परिणाम उत्तर प्रदेश विधान परिषद में इन निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व तय करेंगे।

मतदाता सूची में अपना नाम कैसे जांचें?

स्नातक या शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए पंजीकरण कराने वाले व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल है। इसके लिए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक वेबसाइट https://ceouttarpradesh.nic.in पर उपलब्ध चुनाव संबंधी जानकारी देखी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से भी संपर्क किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, स्नातक और शिक्षक MLC चुनाव का उद्देश्य समाज के इन दोनों वर्गों को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व देना है। लेकिन मतदान का अधिकार केवल डिग्री रखने या शिक्षक के रूप में कार्य करने से नहीं मिलता। निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी करना और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज होना सबसे जरूरी है।

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