गांधर्व संगीत महाविद्यालय में दो घंटे में हुआ संपूर्ण रामलीला का भव्य मंचन

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। गांधर्व संगीत महाविद्यालय में 18 अक्टूबर को नाट्य विभाग के डॉ. विमला गुप्ता नाट्य मंच के कलाकारों ने संदीप सिंहवाल के निर्देशन में संपूर्ण रामलीला का भव्य मंचन किया। दो घंटे के इस कार्यक्रम में रामायण के प्रमुख प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और संवादों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
रामलीला में भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर अयोध्या वापसी तक की प्रमुख घटनाओं का मंचन किया गया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी द्वारा दो वरदान मांगने, भरत को राजगद्दी और श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मिलने के प्रसंग को दिखाया गया। इसके बाद केवट द्वारा श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने, राम विवाह और भरत द्वारा श्रीराम की चरण पादुकाएं अयोध्या ले जाने के दृश्य प्रस्तुत किए गए।

पंचवटी में शूर्पणखा प्रसंग और रावण द्वारा माता सीता के हरण के बाद श्रीराम-लक्ष्मण की सुग्रीव और हनुमान जी से भेंट दिखाई गई। हनुमान जी का अशोक वाटिका पहुंचकर माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका देना, लंका दहन और विभीषण का श्रीराम की शरण में आना भी मंचन के प्रमुख आकर्षण रहे।
इसके बाद लक्ष्मण और मेघनाद के युद्ध, कुंभकर्ण वध तथा श्रीराम-रावण युद्ध का मंचन हुआ। रावण वध के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया गया। अंत में भरत मिलाप, श्रीराम की अयोध्या वापसी और दीप जलाकर उनका स्वागत करने के दृश्य ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
कलाकारों ने निभाईं महत्वपूर्ण भूमिकाएं

राम की भूमिका विपिन कसाना, सीता की पारुल गुप्ता, लक्ष्मण की नितिन, रावण की प्रदीप कश्यप और दशरथ की संदीप सिंह ने निभाई। कैकेयी के रूप में अरुणिमा, मंथरा के रूप में आरती, सुग्रीव के रूप में पंकज प्रजापति, मामा मारीच के रूप में गोविंद और इंद्रजीत के रूप में नरेश राजपूत ने अभिनय किया। कामरान की भूमिका यशवंत, शत्रुघ्न की भानु श्रीवास्तव तथा गुरु वशिष्ठ की भूमिका एम. मोहनलाल अरोड़ा ने निभाई। बाल कलाकारों आलिया, वंश, अवनी, वाणी, शंभु और दीपांशी ने भी सराहनीय अभिनय किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में तरुण गोयल, सुशील कुमार और डॉ. तारा गुप्ता का सहयोग रहा। इस मंचन ने दर्शकों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।



