आत्मज्ञान की दीक्षा के लिए समय के सद्गुरु की शरण में जाना होगा – महात्मा ज्ञान शब्दानन्द जी

गाज़ियाबाद। स्वर्ण जयंतीपुरम बी ब्लॉक के पार्क में मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित सद्भावना सत्संग समारोह में अपने विचार रखते हुए सदगुरु देव श्री सतपाल जी महाराज के आत्मानुभवि शिष्य महात्मा ज्ञान शब्दानन्द जी ने कहा कि देखा देखी भक्ति करने से परमात्मा का अनुभव नहीं होता परमात्मा के अनुभव के लिए हमें समय के तत्वदर्शी महापुरुष की शरण में जाकर आत्मज्ञान की दीक्षा लेनी होगी, तब ही साधना करने से परमात्मा का अनुभव होता है। महात्मा जी ने आगे कहा कि आज समाज में सभी सुख सुविधाएं तो मौजूद हैं, साथ ही कर्मकांडों व भागवत कथाओं की भरमार होने के बाद भी आज अमर्यादित पाप समाज में हो रहे हैं। उसके लिए हमें अपने घरों में आध्यात्मिक वातावरण बनाना होगा तथा साथ ही बच्चों को अच्छे संस्कार देने होंगे, तब ही हमारा समाज व राष्ट्र शक्तिशाली होगा।

समारोह में गाजियाबाद स्थित माता राजेश्वरी आश्रम प्रभारी महात्मा संयुक्ताबाई जी व भूमिकाबाई जी ने भी अपने विचार व भजन प्रस्तुत किये।समारोह से पूर्व पूज्य महात्मा जी, बाईजी का स्थानीय लोगों व कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
कार्यक्रम में शाखा प्रधान के.पी. सिंह, सुभाष त्यागी, चंद्रशेखर गुप्ता, कृषि पाल, राकेश सोलंकी, ए के सिंह, सतीश त्यागी, एडवोकेट नरेश, अरविंद राठौर, अरविंद पुंडीर, राजकुमार शर्मा, एडवोकेट विनोद मित्तल, कालूराम, सुनील कुमार, रामदास, रामचरण,मदन गोपाल, सुमन गुप्ता, रितु व सावित्री वर्मा आदि उपस्थित थे।





