अब कोई बच्चा पढ़ाई में नहीं रहेगा पीछे, UP में जुलाई से चलेगा विशेष अभियान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एक नई पहल शुरू होने जा रही है। अब पढ़ाई में पीछे रह जाने वाले छात्रों की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार जुलाई माह से विशेष ‘कैच-अप शिक्षण’ अभियान शुरू करेगी।
यह अभियान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य उन विद्यार्थियों के लर्निंग गैप (सीखने के अंतर) को कम करना है, जो नियमित कक्षाओं में शामिल होने के बाद भी अपेक्षित अधिगम स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डायट प्राचार्यों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अभियान को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत प्रदेश के सभी संबंधित विद्यालयों में विशेष शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
योजना के अनुसार, जुलाई महीने में सभी विद्यालयों में 15 दिवसीय पुनरावृत्ति शिक्षण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान विद्यार्थियों की वर्तमान शैक्षणिक स्थिति का आकलन किया जाएगा और उनकी जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी।
इसके बाद अगस्त 2026 से जनवरी 2027 तक विद्यालयों में प्रतिदिन 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त कैच-अप शिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें छात्रों को उनके कमजोर विषयों और आवश्यक पाठ्य सामग्री पर विशेष ध्यान देकर पढ़ाया जाएगा।
शिक्षा विभाग का मानना है कि इस अभियान से विद्यार्थियों की बुनियादी समझ मजबूत होगी और वे कक्षा स्तर के अनुरूप ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही शिक्षकों को भी बच्चों की व्यक्तिगत सीखने की जरूरतों को समझने और उसके अनुसार शिक्षण रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा की दौड़ में पीछे न रह जाए और सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिल सके। इस अभियान से स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और छात्रों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।



