
राष्ट्र धर्म सर्वोपरि
रचना–मीना जैन
स्वतंत्र देश की धरा
स्वतंत्र गीत गा रही
स्वतंत्रता के दीप की
ज्योति जगमगा रही…..
चल पड़ीं प्रभात फेरियां
ध्वनित मातृ वंदना
प्राण-प्राण में समाई
राष्ट्र प्रेम प्रेरणा
चलो-चलो ध्वजा लिए
माँ तुम्हें बुला रही…..
भूल न जाएं कभी
बलिदानों की कहानियाँ
गौरव की छवियाँ दर्शाती
प्रांत-प्रांत की झांकियां
ध्वजारोहण का पर्व है
पवन सुमन लुटा रही…..
देश के युवा जनों
देश के हो कर्णधार
प्रगति की दिशा चुनो
अमृतकाल की पुकार
राष्ट्र धर्म सर्वोपरि
त्रिरंगिनी कहे यही…..।
स्वरचित, अप्रकाशित रचना.
मीना जैन
इंदिरापुरम, ग़ाज़ियाबाद।



