
(प्रो अजय कुमार मिश्रा, सीएसयू )
थाईलैंड में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय के साथ एक अकादमिक समझौता किया गया है । इसके अन्तर्गत थाईलैंड में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का एक विदेशी संस्कृत अध्ययन केन्द्र खुलेगा। इस अवसर पर कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेडी सहर्ष कहा कि इससे दक्षिण – पूर्व एशिया में संस्कृत के साथ साथ पाली और भारतीय ज्ञान परम्परा का प्रचुर प्रचार और विस्तार होगा। वस्तुत: संस्कृत को फिर से एक वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में इसे एक अतीव महत्त्वपूर्ण कदम माना जाना चाहिए। इस तरह के प्रयासों से केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एक वैश्विक स्वरूप के रूप में निरन्तर अग्रसर हो रहा है। इससे आने वाले समय में सीएसयू एक अन्तर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रूप में उभरेगा।
यह समझौता भारतीय शिक्षा नीति -2020 के केन्द्र में संस्कृत के विकास की भी पुष्टि करता है। इसके अतिरिक्त पाली भाषा की महत्ता को भी उजागरक्ष करता है। सच में संस्कृत के जरिए डेसापोरा अध्ययन के बल पर विश्व को फिर से रीकनेक्ट किया जा सकता है और सीएसयू भारत का संस्कृत के मामले में नोडल निकाय होने के कारण एक अतीव महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो वरखेडी के साथ साथ सिल्पकॉर्न विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो तनासैत डावहिरुनपत , पद्मश्री चिरापत प्रो मधुकेश्वर भट्ट तथा प्रो राजीव लोचन के साथ अन्य गणमान्य लोग और राजदूत के रूप में पुनीत अग्रविल भी उपस्थित रहे।



