
गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के ज्योतिषाचार्य पं. शिव कुमार शर्मा के अनुसार आगामी 16 जुलाई से गुरु अस्त होने के कारण वैवाहिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु और शुक्र के अस्त होने की स्थिति में विवाह जैसे मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता है।
पं. शिव कुमार शर्मा ने बताया कि 16 जुलाई को रात्रि 2:25 बजे बृहस्पति ग्रह अस्त होंगे। वर्तमान समय में बृहस्पति कर्क राशि में संचरण कर रहे हैं। उसी दिन सूर्य मिथुन राशि से निकलकर रात्रि 11:40 बजे कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य और बृहस्पति के एक ही राशि में आने से गुरु की तेजस्विता प्रभावित होगी और वह अस्त अवस्था में आ जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार गुरु अस्त होने के बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि पूजा-पाठ, मंत्र जाप, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य आध्यात्मिक कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे। पुराने मकान में गृह प्रवेश और भूमि पूजन जैसे कार्य शुभ मुहूर्त देखकर किए जा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी पड़ेगी, जिसके साथ ही चातुर्मास शुरू हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में विश्राम करते हैं। चातुर्मास के दौरान भी विवाह जैसे शुभ कार्यों को नहीं किया जाता।
देवउठनी एकादशी 21 नवंबर 2026 को होगी। इसके बाद भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही विवाह कार्य दोबारा शुरू होंगे। इस तरह करीब 4 महीने 9 दिन तक वैवाहिक आयोजनों पर रोक रहेगी।
जुलाई महीने में विवाह के लिए कुल 10 शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। इनमें 1, 2, 3, 4, 6, 7, 8, 9, 11 और 12 जुलाई शामिल हैं। इसके अलावा आषाढ़ शुक्ल नवमी यानी भड़रिया नवमी 22 जुलाई को लोक प्रसिद्ध अनबूझ विवाह मुहूर्त माना जाता है, लेकिन गुरु अस्त होने के कारण इसका महत्व कम हो जाएगा।
पं. शिव कुमार शर्मा ने बताया कि गुरु का संबंध ज्ञान, धर्म और शुभ कार्यों से माना जाता है, इसलिए गुरु अस्त की स्थिति में वैवाहिक कार्यों से बचने की परंपरा चली आ रही है।



