
इस वर्ष दीपावली का पुण्य पर्व दिनांक 8 नवंबर को मनाया जाएगा।
8 नवंबर को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 11:27 बजे तक है,उसके पश्चात अमावस्या तिथि आ जाएगी जो अगले दिन 12:30 बजे तक है स्वाति नक्षत्र सूर्य उदय से अगले सूर्य उदय तक है इसलिए प्रदोष काल में 8 नवंबर को स्वाति नक्षत्र युक्त दीपोत्सव मनाया जायेगा।
दीपावली पर इस वर्ष बहुत शुभ योग बन रहे हैं ।इसमें प्रमुख योग है आयुष्मान योग, स्वाति नक्षत्र और लग्न में शुक्र सूर्य बुध का त्रिग्रही योग हैं।
इन शुभ योगों से दीपावली पर्व का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है।
दीपावली पूजन के प्रमुख मुहूर्त
भारतवर्ष में दीपावली के अवसर पर व्यापारिक स्थलों को घरों में महालक्ष्मी
दीपावली पूजन होता है।
दिन में संस्थानों ,कार्यालय, दुकान, फैक्ट्री में लक्ष्मी पूजन होता है और रात्रि को घरों में लक्ष्मी गणेश पूजन होता है ।
व्यापारिक स्थलों पर लक्ष्मी गणेश ,दीपावली पूजन के शुभ मुहूर्त,
1.धनु लग्न प्रातः 9:36 से 11:40 तक
(व्यापार और उद्योगों में सफलता दिलाने वाला मुहूर्त)
2. मकर लग्न चर लग्न होता है यह प्रातः 11:40 बजे से दोपहर 1: 22 बजे तक रहेगा।( व्यापारिक स्थलों पर चर लग्न बहुत शुभ होता है)
3. कुंभ लग्न 1:22 बजे से 2:50 बजे तक रहेगा। लक्ष्मी पूजन दीपावली पूजन के लिए उत्तम मुहूर्त है।
विशेष (मकर और कुंभ लग्न का स्वामी शनि होता है इसमें ट्रांसपोर्ट,लोहा ,लकड़ी मशीनरी, उद्योग धंधे इसमें दीपावली एवं महालक्ष्मी पूजन करने से सफलता के अवसर बढ़ते हैं)
मीन लग्न 14:50 बजे से 16:16 बजे तक रहेगा। यह बहुत शुभ मुहूर्त है।
कुछ व्यापारीगण धनतेरस और छोटी दिवाली को भी अपने उद्योगों, कार्यालय ,ऑफिस में पूजन करते हैं। इसमें उपरोक्त लग्न ही श्रेष्ठ रहेंगे।
घर में लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त
1.वृषभ लग्न- शाम 5:51 बजे से 7: 47बजे तक रहेगा (स्थिर लग्न) बहुत ही शुभ है.
2.मिथुन लग्न रात्रि 7:45 से 10:00 बजे तक शुभ मुहूर्त है।
3.कर्क लग्न 10:00 बजे से 12:20 बजे तक रहेगा। यह लक्ष्मी पूजन का उत्तम मुहूर्त है।
5.इसके पश्चात निशीथ काल में सिंह लग्न में लक्ष्मी जी का पूजन बहुत ही श्रेष्ठ माना गया है जिसमें मंत्र सिद्धि ,तंत्र साधना आदि कार्य किए जाते हैं।
(पांच-दिवसीय नहीं ,सात दिवसीय है दीपावली महापर्व) -पंडित शिवकुमार शर्मा
शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के आचार्य पं. शिव कुमार शर्मा ने बताया कि सामान्य रूप से दीपावली का महापर्व धनतेरस से आरंभ होता है। लेकिन रमा एकादशी से ही लक्ष्मी जी के पूजन कार्य आरंभ हो जाते हैं ।
1.प्रथम दिवस कार्तिक कृष्ण एकादशी रमा एकादशी, इसमें एकादशी का व्रत महालक्ष्मी और विष्णु को समर्पित होता है उन्हीं का पूजन होता है।
2. कार्तिक कृष्ण पक्ष द्वादशी ,गौवत्स द्वादशी होता है।भारत में गाय को माता का स्थान प्राप्त है। इस दिन गाय और बछड़े की पूजा होती है। गाय की पूजा देवी के रूप में और बछड़े की पूजा गणेश रुप में होती है। भारत कृषि प्रधान देश है इसलिए गाय और बछड़े के पूजन का बहुत ही महत्व है। इनका पूजन धन-धान्य और लक्ष्मी वृद्धि के लिए किया जाता है।
3. कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी,धनतेरस में भगवान धन्वंतरि की पूजा के रूप में मनाया जाता है और इस दिन सोना, चांदी, वस्त्र, बर्तन आदि खरीदना बहुत ही शुभ माना गया है।
4. कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, छोटी दीपावली हनुमान पूजन, नरक चतुर्दशी, रूप चौदस के रूप में मनाया जाता है।
5. दीपावली महापर्व, कार्तिक कृष्ण अमावस्या को महालक्ष्मी पूजन, दीपावली पूजन का पर्व होता है।
6. कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा गोवर्धन पूजा अन्नकूट पूजा के रूप में मनाया जाता है।
7. कार्तिक शुक्ल द्वितीया भैया दूज के रूप में इस उत्सव मनाते हैं ।
इस प्रकार के साथ दिवसीय पर्व श्रृंखला पूर्ण हो जाती है।
धनतेरस पर्व 6 नवंबर को अमृत सिद्धि योग में मनाया जाएगा। प्रातः काल द्वादशी 10:30 बजे तक है।
इसके पश्चात त्रयोदशी तिथि आरंभ होगी और उत्तम स्वास्थ्य के लिए धनवंतरी पूजन होगा।
12:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक सोना, चांदी, बर्तन, सिक्के, कपड़े, अन्य दीपावली का सामान खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त हैं
7 तारीख को हनुमान जी का पूजन होगा।
क्योंकि चतुर्दशी तिथि उदयकालीन 8 तारीख को ही है इसलिए छोटी दीपावली रूप चौदस 8 तारीख को 12:00 से पहले मनाई जाएगी। पितृ कार्यों के लिए शुभ तिथि है।
8 नवंबर को ही 11:27 बजे से अमावस तिथि आएगी और स्वाति नक्षत्र होगा इसमें दीपावली का पुण्य पर्व मनाया जाएगा।
10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट पूजा की जाएगी।
गोवर्धन पूजन के मुहूर्त-
1.11:32 बजे से 13 14 बजे तक मकर लग्न
2.13,:14 बजे से 14:42 तक कुंभ लग्न
3.16:30 बजे से 1743 बजे तक मेष लग्न
11 नवंबर को भैया दूज उत्सव मनाया जाएगा। बहने अपने भाइयों का तिलक करेंगी ।
भैयाओं को तिलक करने के शुभ मुहूर्त
प्रातः काल 7:00 बजे से 9:24 बजे तक वृश्चिक लग्न
9:24 बजे से 11:30 बजे तक धनु लग्न
(12:00 बजे से 1:30 बजे तक राहुकाल है यह अवधि में तिलक नहीं करना चाहिए)
इसके पश्चात 14:38 बजे से 15:53 बजे तक मीन लग्न में तिलक करना श्रेष्ठ है।
इसके पश्चात तृतीया तिथि आ जाएगी। अति आवश्यक होने पर उसके बाद भी तिलक कर सकते हैं।



