
छोटे हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक, सैकड़ों साधकों ने लिया भाग
गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा आज, 11 अगस्त 2026 को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उत्साह के साथ भव्य काँवड़ यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा में दिल्ली, गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, गुरुग्राम, कानपुर, लखनऊ सहित विभिन्न शहरों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं साधकों ने सहभागिता की।

यात्रा के दौरान श्रद्धालु छोटे हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पावन चिंतन धारा आश्रम पहुँचे। भक्तिमय वातावरण में “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष एवं शिव भजनों के साथ यात्रा संपन्न हुई। आश्रम पहुँचने के बाद सभी श्रद्धालुओं ने आश्रम स्थित शिवलिंग पर मंत्रोच्चार के साथ पवित्र गंगाजल से जलाभिषेक किया।
जलाभिषेक के पश्चात आश्रम में सामूहिक रूप से महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया गया। इसके उपरांत परम पूज्य डॉ. पवन सिन्हा गुरुजी के सान्निध्य में साधकों ने ध्यान का अभ्यास किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा देखने को मिली।

काँवड़ यात्रा के साथ आश्रम द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति सेवा का संदेश भी दिया गया। यात्रा में शामिल काँवड़ियों ने मार्ग में आने वाले राहगीरों को लगभग 600 तुलसी के पौधे वितरित किए गए।
इस सेवा कार्य में तुलसी मैन राजीव त्यागी जी का विशेष सहयोग रहा। पावन चिंतन धारा आश्रम के साधकों ने लोगों को तुलसी के पौधे प्रदान करते हुए पर्यावरण संरक्षण, पौधारोपण एवं भारतीय परंपरा में प्रकृति के महत्व के प्रति जागरूक किया।

उल्लेखनीय है कि पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा सावन माह में “धरा से सेवा, शिव सेवा” अभियान का आयोजन किया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य भगवान शिव की उपासना को प्रकृति एवं पर्यावरण की सेवा से जोड़ना है। आश्रम द्वारा लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनका संरक्षण करने तथा प्रकृति के प्रति अपने दायित्व को समझने के लिए प्रेरित किया जाता है।
आश्रम की ओर से बताया गया कि पावन चिंतन धारा आश्रम में काँवड़ यात्रा केवल शिव आराधना और जलाभिषेक तक सीमित न रहकर सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी बने, यही इस आयोजन का उद्देश्य है। भगवान शिव को जल अर्पित करने के साथ धरती और प्रकृति की सेवा करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने शिव भजनों एवं संकीर्तन में सहभागिता की और समाज में प्रेम, सद्भाव, सेवा, संस्कार तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश देने का संकल्प लिया।
पावन चिंतन धारा आश्रम द्वारा समय-समय पर आध्यात्मिक जागरण, संस्कार निर्माण, योग, ध्यान, सेवा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सावन माह का “धरा से सेवा, शिव सेवा” अभियान भी इसी सेवा-परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


