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अदबी तहजीब को आबाद कर रही है बारादरी: शफक सोपोरी

देश-दुनिया से जुटे अदीबों से गुलजार हुई ‘महफिल-ए-बारादरी’, गीत-गजल और शायरी ने बांधा समां

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। नेहरू नगर स्थित सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में आयोजित ‘महफिल-ए-बारादरी’ में देश-दुनिया से आए साहित्यकारों, कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से अदबी शाम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर डॉ. शफक सोपोरी ने की। उन्होंने कहा कि बारादरी हमारी सांस्कृतिक विरासत और अदबी तहजीब को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। इसके तराने कश्मीर से कन्याकुमारी तक साहित्य और कला की खुशबू पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध पत्रकार एवं कवि अनुराग ‘मुस्कान’ ने कहा कि बारादरी देशभर के फनकारों का ऐसा गुलशन बन चुकी है, जहां गीत, गजल और शायरी के अलग-अलग रंग देखने और सुनने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि मंच पर मौजूद रचनाकारों को सुनकर उन्हें अपने लेखन के शुरुआती दौर की याद आ गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मनीषा जोशी की सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद डॉ. शफक सोपोरी ने अपनी शायरी पेश की, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। उनके शेरों पर लगातार दाद मिलती रही।

मुख्य अतिथि अनुराग ‘मुस्कान’ ने मानवीय रिश्तों और बदलते सामाजिक परिवेश पर आधारित अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी पंक्तियां ‘मिला के कंधा चलने वाला कोई नहीं, मर जाओ तो देने वाले चार मिलेंगे’ श्रोताओं के बीच विशेष रूप से चर्चा का विषय रहीं। उन्होंने अपने लेखन और मीडिया जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि पत्रकारिता की व्यस्तताओं के बीच उनकी शायरी की रदीफ और काफिया भी कहीं पीछे छूट गए।

शायरों की रचनाओं ने बांधा समां

संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंघल ने सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित अपने शेरों से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। वहीं संस्थापिका अध्यक्ष डॉ. माला कपूर ‘गौहर’ ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया। उनके अशआर पर भी श्रोताओं ने जमकर दाद दी।

मशहूर शायर मासूम गाजियाबादी ने अपनी रचनाओं के जरिए सामाजिक और सांप्रदायिक परिस्थितियों पर कटाक्ष किया। रूस से आईं श्वेता सिंह ने भी अपनी रचना के माध्यम से धार्मिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गीतकार इंद्रजीत सुकुमार को ‘बारादरी सृजन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उनकी गीतात्मक रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा।

कार्यक्रम का संयुक्त संचालन खुश्बू सक्सेना और आलोक यात्री ने किया। खुश्बू सक्सेना ने अपनी कविताओं से श्रोताओं की सराहना हासिल की। इसके अलावा डॉ. तारा गुप्ता, नेहा वैद, विनय विक्रम सिंह, आशीष मित्तल और डॉ. नसीम अलीग सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी कविताएं, गीत और शेर प्रस्तुत किए।

युवा शायर आशीष मित्तल की शायरी पर भी खूब तालियां बजीं। वहीं चिकित्सक डॉ. नसीम अलीग ने मां-बेटे के रिश्ते को केंद्र में रखी अपनी रचना से भावनात्मक माहौल बना दिया।

कार्यक्रम में राजीव सिंघल, सुरेंद्र शर्मा, संजीव शर्मा, डॉ. नरेंद्र शर्मा, संजीव निगम ‘अनाम’, प्रदीप भट्ट, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, शरवत उस्मानी, ऋचा सूद, डॉ. राम गोपाल भारतीय, मनीषा जोशी, अभिलाषा विनय, मारिया उस्मानी, संदीप परवाना, मनीषा गुप्ता, संजीव ‘नादान’, शुभ्रा पालीवाल और श्वेता श्रीवास्तव ‘शैदी’ सहित कई रचनाकारों की प्रस्तुतियों को सराहना मिली।

इस दौरान बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और श्रोता मौजूद रहे। सुभाष चंदर, सरवर हसन सरवर, मोनी गोपाल शर्मा, पंडित सत्य नारायण शर्मा, वी.के. शेखर, अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, सुशील शर्मा, सोनम यादव, देवेंद्र शर्मा ‘देव’, अरुण चंद्र राय, विपिन जैन, राधा रमण, डॉ. सुमन गोयल, तिलक राज अरोड़ा, देवेंद्र गर्ग, अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव, सुभाष अखिल, सुमित्रा शर्मा, शशिकांत भारद्वाज, पुनीता झा, संजय भदौरिया, फरहत खान, अर्चना शर्मा, विनोद कुमार तोमर, राज कुमार सिंह, अशहर इब्राहिम, राजेश कुमार, उत्कर्ष गर्ग, डॉ. हिमांशु कुमार सिंह, नीलम सिंह, किरण कुमारी, दीपा वर्मा, मनु बुदेली, श्वेता चौधरी, कल्पना और यश शर्मा समेत अनेक लोग उपस्थित रहे।

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