संस्कार वैभव की संगोष्ठी में त्योहारों से जुड़ी सामाजिक विसंगतियों पर हुई चर्चा

इंदिरापुरम,(आनन्द धारा)। संस्कार वैभव की अक्टूबर माह की संगोष्ठी 9 अक्टूबर 2026 को पार्श्वनाथ मैजेस्टिक फ्लोर्स, इंदिरापुरम,गाजियाबाद में ईभा प्रसाद के आवास पर आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और सामूहिक सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
संगोष्ठी में संस्था की सचिव मनीषी सिन्हा ने पिछले माह की गतिविधियों की रिपोर्ट सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत की। संस्था की अध्यक्ष श्रीमती मीना जैन ने अक्टूबर माह के मांगलिक त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए त्योहारों से जुड़ी सामाजिक विसंगतियों पर विचार रखे। उन्होंने त्योहारों के दौरान प्रचलित अंधविश्वासों, रूढ़ियों, विकृतियों और अनावश्यक प्रदर्शन को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि त्योहारों की मूल भावना को बनाए रखते हुए उन्हें सकारात्मक सामाजिक संदेशों से जोड़ना आवश्यक है।
सामाजिक विसंगतियों और त्योहारों की विकृतियों पर मंथन
संगोष्ठी का विषय ‘सामाजिक विसंगतियां: त्योहार और विकृतियां’ रखा गया। इस विषय पर सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और स्वरचित रचनाओं के माध्यम से सामाजिक समस्याओं तथा त्योहारों के बदलते स्वरूप को प्रस्तुत किया।
प्रख्यात विद्वान श्री विद्या निवास मिश्र की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में उनके निबंध के कुछ अंश मनीषी सिन्हा ने पढ़कर सुनाए। इस प्रस्तुति के माध्यम से साहित्य, विचार और सामाजिक सरोकारों के महत्व को रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन लक्ष्मी भट्ट ने कुशलतापूर्वक किया। संगोष्ठी में उपस्थित सदस्यों ने अपनी-अपनी स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत कीं। साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, त्योहारों की परंपराओं और उनमें समय के साथ आई विकृतियों पर विचार-विमर्श हुआ।
साहित्यिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ समापन
संगोष्ठी में मीना जैन, ईभा प्रसाद, लक्ष्मी भट्ट, मुक्ति बत्रा, संध्या सिंह, निधि वर्मा, मधु मंत्री, आशा सक्सेना और मनीषी सिन्हा उपस्थित रहीं। अंत में ईभा प्रसाद ने सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन और सूक्ष्म जलपान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ। कार्यक्रम में साहित्यिक अभिव्यक्ति के साथ सामाजिक जागरूकता और त्योहारों की मूल भावना को बनाए रखने का संदेश दिया गया।



