
नई दिल्ली,(आनन्द धारा)। भारत में अगली जनगणना (16वीं) दो चरणों में होगी, पहले चरण में 1 अप्रैल 2026 – 30 सितंबर 2026 तक शुरू होगी। यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जो फरवरी 2027 तक पूरी की जाएगी। इसमें घर की सूची बनाने के साथ-साथ जाति-आधारित आंकड़े और 33 सवाल पूछे जाएंगे।
इस बार जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। पहले चरण में (1 अप्रैल 2026 – 30 सितंबर 2026) के बीच हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी, जिसमें हर घर का विवरण दर्ज होगा। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी, जिसमें देश के प्रत्येक नागरिक का डेटा संकलित किया जाएगा।
सरकार इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ले जा रही है। डेटा संग्रह के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो एंड्रॉयड और iOS दोनों पर उपलब्ध होगा। वहीं, निगरानी के लिए ‘सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम’ (CMMS) और अन्य डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सटीक डेटा सुनिश्चित हो सके।
इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए करीब 30 लाख फील्ड कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी, जिनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और अन्य अधिकारी शामिल होंगे। इनमें से अधिकतर कर्मचारी सरकारी शिक्षक होंगे, जो अपनी नियमित ड्यूटी के साथ-साथ जनगणना का कार्य भी संभालेंगे।
उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर भी जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी, ताकि पूरे देश में इस प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सके। साथ ही, जनगणना को लेकर देशभर में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, जिससे लोग सही और समय पर जानकारी देने के लिए प्रेरित हो सकें।
गौरतलब है कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ थी, जिसमें पुरुषों की संख्या 51.54 प्रतिशत और महिलाओं की 48.46 प्रतिशत थी। पिछले दशक में जनसंख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई थी, ऐसे में 2027 की जनगणना से नए और अहम आंकड़े सामने आने की उम्मीद है, जो भविष्य की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।



