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स्वर-ताल प्रस्तुति से झूमे श्रोता, युवा कलाकारों ने बांधा समां

नई दिल्ली,(आनन्द धारा)। गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा, राजघाट में नवोदित कलाकार समिति एवं प्राचीन कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मासिक संगीत समारोह में शास्त्रीय संगीत और तबला वादन की मनमोहक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह समारोह हाल ही में दिवंगत श्रीमती बीना हांडा की पावन स्मृतियों को समर्पित रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुभाष पलसुले तथा सुप्रसिद्ध तबला वादक पंडित प्रदीप सरकार द्वारा मां सरस्वती एवं बीना हांडा के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इस अवसर पर प्रो. रमेश भारद्वाज ने बीना हांडा के संगीत प्रचार-प्रसार में योगदान पर प्रकाश डाला।

समारोह की पहली प्रस्तुति युवा कलाकार नीरज शर्मा और अभिदेव पलसुले के युगल तबला वादन की रही। दोनों कलाकारों ने तीनताल में पेशकार, कायदे और टुकड़ों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर खूब सराहना बटोरी। सारंगी पर अकरम हुसैन की संगत ने प्रस्तुति को और निखारा।

दूसरी प्रस्तुति दिल्ली के प्रतिभाशाली युवा गायक वेदांश मोहन की रही, जिन्होंने राग गोरख कल्याण में विलंबित एकताल और मध्यलय तीनताल की बंदिशों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। राग खमाज में दादरा ‘सुधि न लीनी जब से गये, नैनवा लगाय के’ की प्रस्तुति पर श्रोता भावविभोर होकर झूम उठे। हारमोनियम पर पंडित दीपक शर्मा और तबले पर प्रणय रंजन पाण्डेय की संगत विशेष आकर्षण रही।

समारोह की अंतिम प्रस्तुति प्रतिष्ठित तबला वादक अमृतेश शांडिल्य के एकल तबला वादन की रही। तीनताल में उनकी लयकारी, कायदे और तिहाइयों ने श्रोताओं को प्रभावित किया। सारंगी पर अकरम हुसैन की संगत भी सराहनीय रही।

समारोह के अंत में सभी कलाकारों को पुष्पहार, उत्तरीय एवं ‘कला निधि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन पंडित देवेन्द्र वर्मा ने किया।

कार्यक्रम में कुसुम शाह, दिशारी चक्रवर्ती, प्रभाकर पाण्डेय, प्रसेनजित अधिकारी, रवीन्द्र सोनी, मधुरलता भटनागर सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने समारोह को गरिमा प्रदान की।

22 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा यह मासिक संगीत समारोह युवा प्रतिभाओं को मंच देने और भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बना हुआ है।

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