
साहिबाबाद,(आनन्द धारा न्यूज़)। रविवार 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में एवं सुविख्यात श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से श्री प्रेमपुरी आश्रम परिसर स्थित प्राचीन शिव-हनुमान मंदिर में आयोजित महाशिवरात्रि पर्व एवं नवनिर्मित रसोई उद्घाटन समारोह अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर आश्रम परिसर में निर्मित नई रसोई का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह रसोई भविष्य में सत्संग, भंडारा एवं सेवा कार्यों को अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि यह निर्माण कार्य श्रद्धालुओं के सहयोग एवं सेवा-भाव से संभव हो सका है।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः हवन एवं पूजन से हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान शिव की आराधना की।
सत्संग कार्यक्रम का प्रारंभ मानव उत्थान सेवा समिति के राष्ट्रीय महासचिव श्री आनंदी प्रसाद जी, सुनील कुमार एवं साहिबाबाद क्षेत्र में वार्ड न० 60 निगम पार्षद सचिन डागर जी द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात सरस्वती वंदना पर सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया।।
सत्संग-प्रवचन में आत्म-अनुभवी संत-महात्माओं ने श्रीमद्भगवद्गीता, रामायण एवं अन्य पवित्र ग्रंथों के आधार पर जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों, सेवा-भाव और मानव धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में महात्मा श्री ज्ञानशब्दानन्द जी, महात्मा श्री भजनानंद जी, महात्मा श्री स्वरूपा बाई जी, महात्मा श्री संयुक्ता बाई जी, महात्मा श्री भूमिका बाई जी, महात्मा श्री देव कली बाई जी, महात्मा श्री सुभाषिनी बाई जी, महात्मा श्री अभिषेक बाई जी, महात्मा श्री विनायका नन्द जी सहित अन्य संत-महात्माओं ने अपने सारगर्भित विचारों से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत किया। मधुर भजन-कीर्तन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, सहयोग एवं सेवा-भाव की अद्भुत झलक देखने को मिली।

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मानव सेवा दल, यूथ टीम एवं शाखा आश्रम विभाग सभी की विशेष प्रतिभागिता रही।।
मानव उत्थान सेवा समिति (प्रेमपुरी आश्रम) ने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं, सहयोगकर्ताओं एवं सेवाधारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, भाईचारे और मानवता की भावना को सुदृढ़ करते हैं।



