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बड़ा दिन नहीं, सबसे छोटा दिन होगा 25 दिसंबर को

लेखक: पंडित शिवकुमार शर्मा
शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद

प्रस्तावना
अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि 25 दिसंबर “बड़ा दिन” होता है। किंतु खगोलीय दृष्टि से यह सही नहीं है। वास्तव में इस दिन वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है। इस भ्रम को दूर करने के लिए पंचांगों की गणना पद्धतियों और सूर्य की गति का अध्ययन आवश्यक है।

सायन और निरयण गणना

  • पंचांगों में दो प्रकार की गणनाएं प्रचलित हैं:
  1. सायन गणना – इसमें पृथ्वी की सतह से सूर्य की दूरी को आधार माना जाता है।
  2. निरयण गणना – इसमें पृथ्वी के केंद्र से सूर्य की दूरी को आधार माना जाता है।
  • दोनों गणनाओं में लगभग 23 अंश का अंतर आता है।
  • सायन गणना के अनुसार सूर्य 21 या 22 दिसंबर को ही मकर संक्रांति में प्रवेश करता है और दिन की अवधि बढ़नी शुरू हो जाती है।
  • निरयण गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी को मकर संक्रांति में प्रवेश करता है।

सूर्य की गति और दिन की अवधि

  • 25 दिसंबर को सूर्य प्रातः 7:16 बजे उदय होगा और 17:26 बजे अस्त होगा।
  • इस प्रकार दिन की अवधि केवल 10 घंटे 10 मिनट रहेगी।
  • 22 से 24 दिसंबर तक दिन की अवधि 10 घंटे 11 मिनट रहती है।
  • 26 से 29 दिसंबर तक भी दिन की अवधि 10 घंटे 11 मिनट रहेगी।
  • इसके बाद प्रतिदिन एक-एक मिनट करके दिन बड़ा होता जाएगा।

बड़ा दिन कहने की धारणा

  • 25 दिसंबर को “बड़ा दिन” कहने के पीछे धार्मिक कारण हैं।
  • ईसाई समुदाय इस दिन को यीशु मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाता है।
  • इस कारण इसे “बड़ा दिन” कहा जाता है।
  • किंतु खगोलीय और भौगोलिक दृष्टि से यह सार्वभौमिक सत्य नहीं है।

निष्कर्ष
25 दिसंबर को बड़ा दिन मानना एक सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा है, जबकि खगोलीय गणनाओं के अनुसार यह वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है। हमें इस वैज्ञानिक सत्य को समझना चाहिए और परंपरा व वास्तविकता के बीच अंतर को स्पष्ट करना चाहिए।

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