
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी वरिष्ठ भाजपा नेता प्रह्लाद जोशी को सौंपी गई है। इससे पहले यह मंत्रालय धर्मेंद्र प्रधान के पास था। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिमंडल में बदलाव को मंजूरी देते हुए प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया।
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में उनकी गिनती होती है। संगठन और संसदीय कार्यों में लंबे अनुभव के कारण उन्हें केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिल चुकी हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
अगर उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक विश्वविद्यालय, धारवाड़ से बैचलर ऑफ आर्ट्स (बी.ए.) की डिग्री प्राप्त की है। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा के संगठनात्मक कार्यों से जुड़े।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने संगठन से लेकर संसद तक अपनी अलग पहचान बनाई है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में विभिन्न दलों के बीच समन्वय स्थापित करने की उनकी क्षमता की भी काफी सराहना हुई। अब शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के बाद उनसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा में सुधार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और कौशल आधारित शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की उम्मीद की जा रही है।
शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी के सामने नई शिक्षा नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता बढ़ाने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और छात्रों के लिए रोजगारोन्मुखी शिक्षा को मजबूत बनाने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां और जिम्मेदारियां होंगी। उनकी नियुक्ति को केंद्र सरकार की शिक्षा क्षेत्र में नई प्राथमिकताओं के रूप में देखा जा रहा है।



