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से. रा. यात्री को समर्पित कथा संवाद में ‘कथा रंग’ पुरस्कारों की हुई घोषणा

ग़ाज़ियाबाद,(आनन्द धारा)। कथाकार से. रा. यात्री को समर्पित ‘कथा संवाद’ को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ममता कालिया ने कहा कि यात्री जी की संवेदनशीलता उनके लेखन के साथ उनके निजी जीवन और व्यवहार में भी साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि यात्री जी का जीवन जिन झंझावातों से भरा उनके पात्रों भी उससे जूझते दिखाई देते हैं। वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय ने कहा कि यात्री जी का लेखक उनकी निर्भीक यात्रा का प्रमाण है। वरिष्ठ साहित्यकार अशोक मैत्रेय ने अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए कहा कि अपने लेखन में यात्री जी ने सामान्य मनुष्य के जीवन संघर्ष, संवेदना और बदलते सामाजिक यथार्थ को अत्यंत प्रामाणिकता के साथ अभिव्यक्त किया है।
से. रा. यात्री की जयंती पर आयोजित कथा संवाद में राय ने चार दशक पुराने रिश्ते को याद करते हुए यात्री से जुड़े कई मार्मिक संस्मरण साझा किए। वर्तमान साहित्य के संपादन से शुरू हुई मैत्री की इस यात्रा के कई पड़ाव रहे। राय ने यात्री जी के अंतिम दौर को याद करते हुए कहा कि अंत समय तक यात्री जी चैतन्य रहे। उनकी सबसे बड़ी यंत्रणा स्मरण शक्ति थी, जो अंत तक पहले ही जैसी सतर्क थी। किसी स्थान, व्यक्ति या घटना की विस्मृति उन्हें व्याकुल करती थी। उन्होंने अपने पास एक डायरी और कलम रख ली थी और जिद कर भूले नाम व चेहरे याद करने की कोशिश करते थे। कभी देर रात परिवार के किसी बच्चे का फोन आता कि वह किसी नाम को भूल गए हैं और अस्पष्ट से संदर्भ देकर मुझसे मालूम करने को कह रहे हैं। सामने पाकर भी कई बार मुझे किसी दूसरे प्रसंग को दोहराने को कहते। अगर मैं बता पाता, तो वह थके चेहरे पर झलकने वाली खुशी के साथ डायरी में उसे दर्ज कर डालते। ममता कालिया ने कहा कि यात्री जी में अपने नाम सेवा के अनुरूप सेवा भाव कूट कूट कर भरा था। प्राणियों से लेकर तमाम जीवों से उनका प्रेम जगजाहिर है। उन्होंने सेवा राम गुप्ता के से. रा. यात्री होने का प्रसंग भी रोचकता से सुनाया।
इस अवसर पर डॉ. बीना शर्मा ने उनकी कहानी ‘आकाशचारी’ का वाचन किया। साहित्यकार कमलेश भट्ट ‘कमल’ व अशोक मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार नवोदित, रंगकर्मी अक्षयवर नाथ श्रीवास्तव व अनिल शर्मा व उनके पुत्र आलोक यात्री ने भी यात्री जी के साथ अपने अनुभव साझा किए। कमलेश्वर भट्ट ‘कमल’ की पुस्तक ‘किताबों की जगमग दुनिया’ के लोकार्पण पर प्रकाशक राहुल शिवाय ने पुस्तक का मर्म श्रोताओं से साझा किया। ‘कथा रंग’ द्वारा विविध वर्षों में आयोजित कहानी प्रतियोगिता के विजेताओं वंदना वाजपेई, सिनीवाली व रिंकल शर्मा को पुरस्कार राशि सौंपी गई। इस अवसर पर ‘कथा रंग’ के संयोजक आलोक यात्री व निर्णायक मंडल के सदस्य कमलेश भट्ट ‘कमल’ ने वर्ष 2024-25 में आयोजित कथा रंग कहानी प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में रेनू अंशुल, डॉ. अजय गोयल, रश्मि वर्मा और शिवराज सिंह की कहानी पर गंभीर विमर्श हुआ। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. निधि अग्रवाल ने कहा कि कथा संवाद जैसे कि कार्यक्रम रचनाकारों को संवारने, मांजने और गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सुनी गई कहानियों पर सुभाष चंदर ने कहा कि आज के दौर में लेखक रफ्तार के घोड़े पर सवार होकर कहानी लिखने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि कहानी ठहराव मांगती है। उन्होंने कहा कि कथा संवाद जैसी कार्यशाला का उद्देश्य लेखन की भटकन को चिह्नित करना है। जिसे आलोचना कतई न समझा जाए। विमर्श में सुरेंद्र सिंघल, बख्तावर हनीफ, सिनीवाली, विनय विक्रम सिंह, प्रदीप भट्ट, वागीश शर्मा आदि ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन आलोक यात्री और रिंकल शर्मा ने संयुक्त रूप से किया। अद्विक प्रकाशन के संचालक अशोक गुप्ता ने ‘कथा रंग’ की भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर आलोक यादव, वी. के. शेखर, रवि पाराशर, डॉ. रत्नापन्निकर, अतुल सिन्हा, अनिल मीत, डॉ. वीना मित्तल, सरवर हसन, सुभाष अखिल, प्रताप सिंह, आलोक शुक्ला, डॉ. सुधीर त्यागी, डॉ. ईश्वर सिंह तेवतिया, अनिमेष शर्मा ‘आतिश’, तुलिका सेठ, राधा रमण, प्रवीण शंकर त्रिपाठी, डॉ. संजय शर्मा, सावित्री शर्मा, डॉ. माला शर्मा, अविनाश शर्मा, शकील अहमद, तेजवीर सिंह, पं. सत्य नारायण शर्मा, संजय श्रीवास्तव, के. के. जायसवाल, पवन गहलौत, पूनम जोशी, अभिलाषा विनय, पराग कौशिक, टेकचंद, डॉ. शकीला बानो, रमेश खुराना, अभिषेक कौशिक, आबेद खान, राजीव शर्मा, प्रभात चौधरी, आशु गोस्वामी, तिलक राज अरोड़ा, कविता अरोड़ा, डॉ. आर. के. सिंह, सारिका शर्मा, छाया, जैनेन्द्र कुमार जैन, मनीषा गुप्ता, विनोद कुमार तोमर, ऊषा जैन, विजय लक्ष्मी, पुनीता सिंह, स्नेहलता पांडे, जोया व अनन्य शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

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