गांधर्व संगीत महाविद्यालय में कृष्ण लीला का भव्य मंचन, कलाकारों ने जीवंत किए श्रीकृष्ण के विविध रूप

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर गांधर्व संगीत महाविद्यालय (पंजी.) के गांधर्व नाट्य विभाग एवं डॉ. विमला गुप्ता नाट्य मंच के कलाकारों द्वारा भव्य श्रीकृष्ण लीला नाट्य मंचन किया गया। संदीप सिंघवाल के निर्देशन में प्रस्तुत इस संगीतमय नाट्य कार्यक्रम ने दर्शकों को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर कंस वध तक की कथा से रूबरू कराया।
महाविद्यालय के सचिव तरुण गोयल ने बताया कि नाट्य मंचन में संगीतमय संवादों और गीतों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन की विभिन्न लीलाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीकृष्ण-रुक्मिणी संवाद से हुई। इसके बाद मीरा-राधा प्रसंग, पूतना वध, बकासुर वध, कागासुर वध, कालिया नाग मर्दन, गोपियों के साथ रासलीला, मटकी फोड़ना और माखन चोरी जैसी बाल लीलाओं ने दर्शकों का मन मोह लिया।

नाटक में गोवर्धन पर्वत उठाने, अक्रूर द्वारा कृष्ण-बलराम को मथुरा ले जाने और गोपियों के विरह की भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं कंस के धोबी से वस्त्र छीनने, कंस का धनुष तोड़ने और अंत में कंस वध के प्रसंग को भी प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। कंस वध के बाद देवकी और वासुदेव की कारागार से मुक्ति के दृश्य ने प्रस्तुति को भावनात्मक चरम पर पहुंचाया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में गांधर्व संगीत महाविद्यालय की अध्यक्ष, निदेशक एवं संस्थापक डॉ. तारा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।
नाट्य मंचन में उर्वशी महेडिया ने बड़े कृष्ण, वंश महेडिया ने बाल कृष्ण, नरेश राजपूत ने कंस, अरुणिमा ने देवकी एवं रोहिणी, पंकज प्रजापति ने वासुदेव, संदीप सिंघवाल ने नंद बाबा, पारुल गुप्ता ने यशोदा, वाणी गुप्ता ने राधा, अवनी गुप्ता ने मीरा, प्राची ने रुक्मिणी, विपिन कसाना ने अक्रूर और नितिन वर्मा ने नारद एवं उद्धव की भूमिका निभाई।

इसके अलावा आरती श्रीवास्तव ने पूतना, सुदामा ने भानु, गोविंद ने सैनिक, दुष्यंत राजपूत ने कालिया नाग, दीपांशी एवं इशिता वार्ष्णेय ने गोपियों तथा शंभू ने ग्वाले की भूमिका निभाई। कलाकारों के शानदार अभिनय, संवाद अदायगी और संगीतमय प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा।



