Homeगाजियाबादशिक्षासामाजिक

“जियो और जीने दो” के भाव से ही संभव है पर्यावरणीय न्याय: एम.एम.एच. कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

गाजियाबाद,(कुलदीप)। एम.एम.एच. कॉलेज में 27-28 फरवरी 2026 को आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन पर्यावरणीय न्याय के संकल्प के साथ हुआ। 28 फरवरी को दूसरे दिन प्रातः 10 बजे से विभिन्न सभागारों- ऑडिटोरियम (कुंवर बेचैन हाल), बी.सी.ए. भवन, पी.एल.टी., रमन हाल (भौतिक विज्ञान विभाग) तथा बॉटनी लैब में ऑनलाइन और ऑफलाइन व्याख्यान, शोध-पत्र एवं पोस्टर प्रस्तुतियों के समानांतर सत्र आयोजित किए गए।

मुख्य सत्र की अध्यक्षता प्रोफेसर प्रकाश चौधरी ने की। डॉ. सुखदेव प्रजापति ने रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरकों के प्रयोग पर बल दिया, जबकि डॉ. प्रदीप कुमार ने विकसित भारत की पर्यावरणीय चुनौतियों और समाधान पर विचार रखे। इंजीनियर आर.के. त्यागी ने पंचतत्व-जल, पावक, गगन, समीर और पृथ्वी के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के विविध आयाम स्पष्ट किए।

दिनभर चले विभिन्न सत्रों में जलवायु परिवर्तन, माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण, जलीय जीवन पर प्रभाव, पर्यावरणीय अनुकूलन क्षमता और इमर्जिंग फोटोकैटलिस्ट जैसे विषयों पर लगभग 300 शोध-पत्र और उत्कृष्ट पोस्टर प्रस्तुत किए गए। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए, जिनमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

समापन सत्र के मुख्य अतिथि भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव हरीश शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि हम “जियो और जीने दो” की भावना अपनाएं, तो पर्यावरणीय न्याय स्वतः संभव हो सकेगा।

महाविद्यालय के सचिव अभिनव कृष्ण, संयोजक डॉ. राजपाल त्यागी, प्राचार्य प्रोफेसर संजय सिंह सहित प्रबंधन समिति एवं प्राध्यापकों ने अतिथियों का सम्मान शॉल, स्मृति चिन्ह एवं पौधा भेंट कर किया। संगोष्ठी के सफल संचालन हेतु डॉ. रश्मि सिंह सहित सभी सहयोगियों की सराहना की गई।

कार्यक्रम के अंत में “रामावती भटनागर यंग साइंटिस्ट सम्मान” डॉ. हरिदत्त शर्मा एवं डॉ. रश्मि सिंह को प्रदान किया गया, जबकि संगोष्ठी संयोजक डॉ. राजपाल त्यागी को “भवानंद पर्यावरण रत्न” सम्मान से अलंकृत किया गया।

दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक उत्तरदायित्व का संदेश देते हुए यह स्पष्ट किया कि सतत विकास और पर्यावरणीय न्याय जन-सहभागिता से ही संभव है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button