
ग़ाज़ियाबाद,(आनन्द धारा) 25 मार्च को एम. एम. एच. कॉलेज, ग़ाज़ियाबाद के अंग्रेजी विभाग में अंग्रेजी साहित्य के जाने-माने उपन्यासकार ने वर्तमान विश्व में नयी पीढी के नव आंदोलनों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि भारत के नौजवान अपनी जड़ों से बहुत मजबूती से जुड़े हुए है। उनमें पारिवारिक मूल्यों के प्रति जो अनुराग है, वह भारतीय समाज की सामाजिक विरासत है। अपने राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध की भावना भारतीय युवाओं की खास विशेषता है।
अंग्रेज़ी विभाग द्वारा “साहित्य और जेन-ज़ी: समझ और चुनौतियाँ” विषय पर एक महत्वपूर्ण साहित्यिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 25 मार्च 2026 को महाविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ, जिसमें प्राध्यापकगण एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात लेखक, उपन्यासकार एवं कवि प्रो. विकास शर्मा जी, चौ. चरण विश्वविधालय, मेरठ के अंग्रेज़ी विभाग में प्रोफेसर हैं। अपने व्याख्यान में उन्होंने जेन-ज़ी (नई पीढ़ी) और साहित्य के बदलते संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी डिजिटल माध्यमों से अधिक जुड़ी हुई है, जिससे उनके पढ़ने के तरीके, रुचियाँ और अभिव्यक्ति के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन आ रहा है।
प्रो. शर्मा ने इस बात पर बल दिया कि अब साहित्य केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज सोशल मीडिया, ब्लॉग्स और डिजिटल कंटेंट के माध्यम से नए रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने जेन-ज़ी के सामने उपस्थित चुनौतियों—जैसे ध्यान की कमी, त्वरित संतुष्टि की प्रवृत्ति, और गहराई से पढ़ने की घटती आदत—पर भी चिंता व्यक्त की। साथ ही विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि साहित्य व्यक्ति के भीतर संवेदनशीलता, चिंतन और सृजनशीलता को विकसित करता है, इसलिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ साहित्य से जुड़ाव बनाए रखना नयी पीढी के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनके व्याख्यान के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र रहा।, जिसमें विद्यार्थियों ने जेन-ज़ी और साहित्य के संबंध में अपने विचार साझा किए और जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। वही आज के इस विचार विमर्श कार्यक्रम की मुख्य अथिति प्रो. निशा, बनारस हिंदू विश्व विधालय की अंग्रेजी विभाग की शिक्षिका ने भारतीय युवाओं को अपने राष्ट्र और समाज के प्रति बेहद संवेदनशील बताया। कार्यक्रम के विशिष्ट अथिति एल. आर. कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो उदयवीर सिंह ने युवाओं को आगाह करते हुए कहा हमें अपने समाज के मूल्यों को ध्यान में रखकर ही जीवन जीना चाहिए। पश्चिम के अंधानुकरण और बाजार के दबावो से बचना होगा।

अंग्रेज़ी विभाग के इस सार्थक प्रयास की प्रशंसा करते हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविधालय के प्राचार्य डॉ संजय सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को साहित्य के प्रति न सिर्फ जागरूक करेंगे, बल्कि उन्हें वर्तमान समय की चुनौतियों को समझने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करेंगे। इस विचार विमर्श में वी.एम.एल.जी. कॉलेज अंग्रेजी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ कनक जी और लखावठी कॉलेज की डॉ दिव्या पाठक ने भी अपने विचार रखे। वही कार्यक्रम का बहुत ही प्रभावी और सुंदर संचालन डॉ रिया देशवाल जी के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में एम. एम. एच. कॉलेज के अंग्रेजी विभाग की अध्यक्षा प्रो. सुता कुमारी जी ने सभी का आभार व्यक्त किया और अपने शोधार्थी जितेंद्र कुमार को आज पी-एच डी. फाइनल वायवा की बधाई दी। सबने उन्हें डॉक्टर होने की बधाई दी। वही सभी उपस्थित शिक्षकों ने प्रो. गौतम बनर्जी के दिशा निर्देशन में शोध कर रहे शोधार्थी अजय और पुष्पेंद्र के प्री पी-एच.डी. सेमीनार के सुंदर प्रस्तुतीकरण की प्रशंसा की। वही कार्यक्रम के मुख्य आयोजक प्रो. गौतम बनर्जी ने सभी सहभागियों को जलपान के लिए आमंत्रित करते हुए सभी श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विभाग के सभी शिक्षक प्रो. भारती गुप्ता, डॉ. स्वर्निल डे, प्रो. सुरेखा अहलावत, छाया रानी सहित महाविधालय के दो मनोज कुमार, प्रो. राकेश राणा, मूलचंद वर्मा, डॉ सीमा रानी, मीनाक्षी, सहित कॉलेज के चीफ प्रोक्टर प्रो. रविंद्र यादव और डीन डॉ प्रकाश चौधरी आदि उपस्थित रहे।



