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अमर भारती साहित्य संस्कृति ने की पुस्तकालय की स्थापना, उदघाटन समारोह में जुटे शहर के कवि, लेखक, चित्रकार व रंगकर्मी


ग़ाज़ियाबाद,(आनन्द धारा)। शहर में अच्छे सार्वजनिक पुस्तकालयों के अभाव को दूर करने के उद्देश्य से अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान ने गोविन्दपुरम कालोनी में एक पुस्तकालय की स्थापना की है। उद्घाटन समारोह में शहर के कवि, लेखक, चित्रकार व रंगकर्मी शामिल हुए।इस अवसर पर पुस्तक संस्कृति विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन भी किया गया।परिचर्चा को शुरू करते हुए आकाशवाणी के पूर्व उपनिदेशक सोमदत्त शर्मा ने समाज के सतत बौद्धिक विकास के लिए पुस्तकालयों की भूमिका को अहम बताया।सुप्रसिद्ध आलोचक वेद शर्मा वेद ने कहा कि हज़ारों सालों का ज्ञान पुस्तकों में संचित है, इसलिए शहर-शहर अच्छे पुस्तकालय बनने चाहिएँ।परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए प्रख्यात कहानीकार विपिन जैन ने घरों में पुस्तकों के लिए सिकुड़ते हुए स्पेस पर चिंता ज़ाहिर की।
इसी कड़ी में आजकल पत्रिका के पूर्व संपादक डॉ योगेन्द्र दत्त शर्मा ने ग़ाज़ियाबाद शहर में कला-साहित्य के उन्नयन के लिए उपयुक्त स्थानों व संसाधनों की कमी पर अफ़सोस ज़ाहिर किया।उन्होंने बताया कि स्वर्गीय हर प्रसाद शास्त्री ने कला-साहित्य के विकास के लिए हिंदी भवन का निर्माण करवाया, लेकिन आज वह कुछ पूँजीपतियों की निजी जागीर बनकर रह गया।

परिचर्चा को और सार्थकता प्रदान करते हुए चर्चित पुस्तक ‘गंगा तीरे’ के लेखक व वरिष्ठ पत्रकार अमरेन्द्र राय ने कहा कि पुस्तकें आज भी ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख श्रोत बनी हुई हैं।सुप्रसिद्ध चित्रकार डॉ लाल रत्नाकर ने कला-साहित्य के प्रति शहर के जनप्रतिनिधियों व अफ़सरशाही के उपेक्षापूर्ण रवैये का ज़िक्र किया। कथाकार सुभाष अखिल ने पुस्तकालय को पुस्तकालय विज्ञान के अनुसार व्यवस्थित करने का सुझाव दिया।कथाकार रविंद्र कान्त त्यागी ने सृजन की दुनिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दख़ल का मुद्दा उठाया।कवयित्री सविता शर्मा ने पुस्तकों को उपहार में देने की परंपरा को बनाए रखने पर ज़ोर दिया।
परिचर्चा में हापुड़ से आयी कवयित्री कमलेश त्रिवेदी फ़र्रूख़ाबादी, पत्रकार शकील अहमद, कवि व रंगकर्मी दीपक श्रीवास्तव, संगीतकार डॉ रमेश कुमार भदौरिया एवं कवि बृजेश सिंह ने भी अपने मूल्यवान विचार साझा किए।परिचर्चा का संचालन पुस्तकालय के प्रबंधक प्रवीण  कुमार ने किया।संस्थान के संस्थापक व सुप्रसिद्ध गीतकार डॉ धनंजय सिंह ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता तेजपाल  सिंह, सॉफ़्टवेयर इंजीनियर अरुण चौधरी, शैलेंद्र सिंह, वित्तीय सलाहकार पुनीत श्रीवास्तव, समाजसेवी अरुण शर्मा, पर्यावरणविद राजीव त्यागी, वनस्पति शास्त्री गरिमा कुमार व इंजीनियरिंग के छात्र कुमार आर्यन भी उपस्थित रहे।

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