UP के 15 जिलों में बोतलबंद पानी असुरक्षित, जांच में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

उत्तर प्रदेश। बोतलबंद पेयजल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। राज्य के 15 जिलों में जांच के दौरान कई ब्रांडों के पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर में कोलिफार्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार यह बैक्टीरिया पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और इसे मानव स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित माना जाता है।
सूत्रों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न जिलों में बोतलबंद पानी के सैंपल लिए गए थे। जांच रिपोर्ट में कई ब्रांडों के पानी में कोलिफार्म बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई। इसके बाद संबंधित ब्रांडों के उत्पादों को असुरक्षित घोषित करते हुए विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोलिफार्म बैक्टीरिया आमतौर पर गंदगी और दूषित जल स्रोतों की ओर संकेत करता है। इस प्रकार का पानी पीने से पेट संबंधी संक्रमण, दस्त, उल्टी और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक माना जाता है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने बताया कि जिन कंपनियों के सैंपल फेल पाए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। साथ ही संबंधित उत्पादन इकाइयों की जांच भी शुरू कर दी गई है। विभाग ने कहा कि जनता के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, प्रभावित जिलों में कई लोकप्रिय और स्थानीय ब्रांडों के पानी के नमूने जांच में फेल हुए हैं। विभाग अब बाजार में बिक रहे पैकेज्ड पानी की निगरानी और सख्ती बढ़ाने की तैयारी में है। अधिकारियों ने दुकानदारों और वितरकों को भी गुणवत्ता मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि बोतलबंद पानी खरीदते समय उसकी सील, निर्माण तिथि और मानक प्रमाणन अवश्य जांचें। यदि पानी के स्वाद या गंध में किसी प्रकार का बदलाव महसूस हो तो उसका उपयोग न करें।
इस खुलासे के बाद आम लोगों में चिंता बढ़ गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिन ब्रांडों पर भरोसा करके पानी खरीदा जाता है, यदि वही सुरक्षित नहीं हैं तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। विभाग की जांच जारी है और आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी सैंपलिंग अभियान तेज किए जाने की संभावना है।



