TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, 60 विधायकों की सक्रियता से सियासी हलचल तेज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के अंदर बढ़ती राजनीतिक हलचल के बीच बुधवार को करीब 60 विधायक विधानसभा पहुंचे, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ विधायक संगठन के भीतर एक अलग शक्ति केंद्र बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटनाक्रम ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं।
इस पूरे विवाद के केंद्र में पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं और संगठन के भीतर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विवाद की शुरुआत उस शिकायत से हुई, जिसमें ऋतब्रत बंद्योपाध्याय और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता के समर्थन से जुड़े एक प्रस्ताव पर कुछ विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से किए गए थे। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा सचिवालय ने मामला दर्ज कराया और जांच के आदेश दिए।
फिलहाल इस मामले की जांच अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और शिकायतों की पड़ताल कर रही है। मामले के राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए राज्य की राजनीति में इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद इसी तरह बढ़ते रहे तो इसका असर संगठन की एकजुटता पर पड़ सकता है। वहीं टीएमसी नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और असंतुष्ट नेताओं को मनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
चुनाव के बाद उभरी यह गुटबाजी आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें सीआईडी जांच और पार्टी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई हैं।



