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गाजियाबाद पुलिस को जर्नलिस्ट अपूर्वा का खुला चैलेंज- “अगर हम गुनहगार हैं तो करो गिरफ्तार, तानाशाही से डरेंगे नहीं”

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। जनपद में निष्पक्ष पत्रकारों के उत्पीड़न, भ्रष्टाचार और अपराधियों को पुलिसिया संरक्षण दिए जाने के खिलाफ आज से पत्रकारों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। विजयनगर पुलिस की कार्यप्रणाली और उच्चाधिकारियों की वादाखिलाफी से नाराज पीड़ित पत्रकार और न्यायप्रिय नागरिक आज सुबह से जिला मुख्यालय के सामने बेमियादी (अनिश्चितकालीन) धरने पर बैठ गए हैं। इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहीं वरिष्ठ महिला पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने गाजियाबाद पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।
अपूर्वा चौधरी ने कहा कि 10 बार से भी अधिक गुहार लगाने के बाद भी नहीं मिला न्याय, साक्ष्य उनकी टेबल पर है पर साहब व्यस्त हैं।
जिला मुख्यालय पर धरने की शुरुआत करते हुए जर्नलिस्ट अपूर्वा चौधरी ने आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस पूरी तरह से अपराधियों के साथ सांठगांठ कर चुकी है। उन्होंने कहा: हमारी महिला पत्रकार साथी सुमन मिश्रा के साथ 11 मई को सरेआम छेड़छाड़ और बदतमीजी की गई। रसूखदार आरोपी कैलाश चंद शर्मा के खिलाफ 112 नंबर और लिखित शिकायत देने के बाद भी पुलिस हफ्ते भर सोती रही। जब हम न्याय के लिए पुलिस चौकी पहुंचे, तो पुलिस ने उल्टे हमारे साथ ही अपराधियों जैसा व्यवहार किया।
अपूर्वा चौधरी ने आगे बताया कि वह और उनके साथी पुलिस कमिश्नर के आदेशानुसार अब तक 10 से ज्यादा बार एडिशनल कमिश्नर महोदय से मिलकर न्याय की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन और टालमटोल मिली। अधिकारियों के पास न्याय की फाइल पर दस्तखत करने का समय नहीं है।
मामले का विवरण देते हुए अपूर्वा चौधरी ने बताया कि 20 मई को सिद्धार्थ विहार की ‘जल निगम चौकी’ पर तैनात सब-इंस्पेक्टर आयुष कुमार ने दैनिक समाचार पत्र ‘भारत का बदलता शासन’ के संपादक ललित चौधरी को सरेआम गालियां दीं और जबरन जीप में डालकर उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की। हद तो तब हो गई जब पुलिस ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए आधी रात को आरोपियों के घर जाकर खुद झूठी शिकायतें तैयार करवाईं और पत्रकारों के खिलाफ ही फर्जी मुकदमा (मु0अ0सं0 0267/2026) दर्ज कर दिया, जिसमें छेड़छाड़ और पुलिस से धक्का-मुक्की के मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं।
पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि एसीपी उपासना पांडेय अपनी गरिमा भूलकर अपराधियों को सुरक्षा कवच दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एसीपी महोदय ने हमारी सामाजिक और पत्रकारिता की छवि को बदनाम करने के लिए एक महिला का भ्रामक व तथ्यहीन वीडियो बनवाया और उसे खुद अपने सीयूजी (CUG) मोबाइल नंबर से मीडिया ग्रुप्स में वायरल किया। यह सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग और आपराधिक कृत्य है।
पत्रकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है और यह दिन-रात जारी रहेगा। अपूर्वा चौधरी ने मुख्य रूप से तीन मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं: फर्जी मुकदमा निरस्त हो, दोषी पुलिसकर्मी निलंबित हों, आरोपियों पर मुकदमा दर्ज़ कर तत्काल गिरफ्तारी हो।
अपूर्वा चौधरी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि गाजियाबाद जिला मुख्यालय पर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन यहीं नहीं थमेगा। इसके बाद समस्त पत्रकार साथी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय (DGP ऑफिस) के बाहर डेरा डालेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश शासन और गाजियाबाद पुलिस प्रशासन की होगी।
इस अवसर पर एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री पंकज शर्मा , संगठन मंत्री पवन चौधरी , महेश त्यागी , सतीश कुमार राजीव सिंह, राहुल कुमार, सविता चौधरी, ऋषि अग्निहोत्री, रोहित, अश्विनी सहित दर्ज़नो पत्रकार साथी और समाजसेवी नरेश कुमार कीर मौजूद रहे।

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