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मानसून की आहट पर पं. शिवकुमार शर्मा की स्वरचित कविता ने प्रकृति का मनोहारी चित्र किया प्रस्तुत

आज प्रातःकाल मानसून की आहट।
बादल की चाल, पक्षियों की चहचहाहट।।
काले काले मोटे बादल।
गरज-गरज के हो गये पागल।।
बादल बीच दामिनी दमकी।
किसानों की आशाएं चमकी।।
हवाएं भी चल पड़ी पुरवाई।
प्रकृति में नवचेतना आई।।
घुमड़-घुमड़ कर बरसों बदरा।
तर कर दो धरती को बदरा।।
पेड़ पौधों में नवजीवन आया।
पशु पक्षियों ने नवराग गाया।।
बादल आए खुशियां लाए।
मानसून अब वापस न जाए।।
रिमझिम रिमझिम बरसे बूंदे।
धरा से मिलकर हरषे बूंदें।।
सोंधी सोंधी अब महकी धरती ।
शस्य श्यामला बन चहकी धरती।।

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